काष्ठं कल्पतरुः सुमेरुरचलश्चिन्तामणिः प्रस्तरः
सूर्यस्तीव्रकरः शशी क्षयकरः क्षारो हि वारां निधिः ।
कामो नष्टतनुर्वलिर्दितिसुतो नित्यं पशुः कामगौर्
नैतांस्ते तुलयामि भो रघुपते कस्योपमा दीयते ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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