पीतः क्रुद्धेन तातश्चरणतलहतो वल्लभो येन रोषा
दाबाल्याद्विप्रवर्यैः स्ववदनविवरे धार्यते वैरिणी मे ।
गेहं मे छेदयन्ति प्रतिदिवसमुमाकान्तपूजानिमित्तं
तस्मात्खिन्ना सदाहं द्विजकुलनिलयं नाथ युक्तं त्यजामि ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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