न ध्यातं पदमीश्वरस्य विधिवत्संसारविच्छित्तये
स्वर्गद्वारकपाटपाटनपटुर्धर्मोऽपि नोपार्जितः ।
नारीपीनपयोधरोरुयुगला स्वप्नेऽपि नालिंगितं
मातुः केवलमेव यौवनवनच्छेदे कुठारा वयम् ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
|
No words for this verse.
| |||||||