वित्तं देहि गुणान्वितेषु मतिमन्नान्यत्र देहि क्वचित् ।
प्राप्तं वारिनिधेर्जलं घनमुखे माधुर्ययुक्तं सदा ॥
जीवान्स्थावरजंगमांश्च सकलान्संजीव्य भूमण्डलं ।
भूयः पश्य तदेव कोटिगुणितं गच्छन्तमम्भोनिधिम् ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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