दह्यमानाः सुतीव्रेण नीचाः परयशोऽग्निना
अशक्तास्तत्पदं गन्तुं ततो निन्दां प्रकुर्वते ॥
दरिद्रता धीरतया विराजते
कुस्त्रता शुभ्रतया विराजते ॥
कदन्नता चोष्णतया विराजते
कुरूपता शीलतया विराजते ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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