पाणिनीय धातुपाठः

पाणिनीय धातुपाठः

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Verse Number Sanskrit Verse
1.1 भू सत्तायाम् । उदात्तः परस्मैभाषः ॥
1.2 एध वृद्धौ ॥
1.3 स्पर्ध सङ्घर्षे ॥
1.4 गाधृ प्रतिष्ठालिप्सयोर्ग्रन्थे च ॥
1.5 बाधृ लोडने विलोडने ॥
1.6 नाधृऽ ॥
1.7 नाथृ याच्ञोपतापैश्वर्याशीष्षु ॥
1.8 दध धारणे ॥
1.9 स्कुदि आप्रवणे ॥
1.10 श्विदि श्वैत्ये ॥
1.11 वदि अभिवादनस्तुत्योः ॥
1.12 भदि कल्याणे सुखे च ॥
1.13 मदि स्तुतिमोदमदस्वप्नकान्तिगतिषु ॥
1.14 स्पदि किञ्चिच्चलने ॥
1.15 क्लिदि परिदेवने ॥
1.16 मुद हर्षे ॥
1.17 दद दाने ॥
1.18 ष्वदऽ ॥
1.19 स्वर्द आस्वादने ॥
1.20 उर्द माने क्रीडायां च ॥
1.21 कुर्दऽ ॥
1.22 खुर्दऽ ॥
1.23 गुर्दऽ गुडक्रीडायामेव ॥
1.24 गुद क्रीडायामेव ॥
1.25 षूद क्षरणे ॥
1.26 ह्राद अव्यक्ते शब्दे ॥
1.27 ह्लादी सुखे च ॥
1.28 स्वाद आस्वादने ॥
1.29 पर्द कुत्सिते शब्दे ॥
1.30 यती प्रयत्ने ॥
1.31 युतृऽ ॥
1.32 जुतृ भासने ॥
1.33 विथृऽ ॥
1.34 वेथृ याचने ॥
1.35 श्रथि शैथिल्ये ॥
1.36 ग्रथि कौटिल्ये ॥
1.37 कत्थ श्लाघायाम् ॥
1.38 अत सातत्यगमने ॥
1.39 चिती सञ्ज्ञाने ॥
1.40 च्युतिर् आसेचने ॥
1.41 श्चुतिर् इत्येके ॥
1.42 श्च्युतिर् क्षरणे ॥
1.43 ज्युतिर् भासने ॥
1.44 मन्थ विलोडने ॥
1.45 कुथिऽ ॥
1.46 पुथिऽ ॥
1.47 लुथिऽ ॥
1.48 मथि हिंसासङ्क्लेशनयोः ॥
1.49 षिध गत्याम् ॥
1.50 षिधू शास्त्रे माङ्गल्ये च ॥
1.51 खादृ भक्षणे ॥
1.52 खद स्थैर्ये हिंसायां च ॥
1.53 बद स्थैर्ये ॥
1.54 गद व्यक्तायां वाचि ॥
1.55 रद विलेखने ॥
1.56 णद अव्यक्ते शब्दे ॥
1.57 अर्द गतौ याचने च ॥
1.58 नर्दऽ ॥
1.59 गर्द शब्दे ॥
1.60 तर्द हिंसायाम् ॥
1.61 कर्द कुत्सिते शब्दे ॥
1.62 खर्द दन्दशूके ॥
1.63 अतिऽ ॥
1.64 अदि बन्धने ॥
1.65 इदि परमैश्वर्ये ॥
1.66 बिदि अवयवे ॥
1.67 भिदि इत्येके ॥
1.68 गडि वदनैकदेशे ॥
1.69 णिदि कुत्सायाम् ॥
1.70 टुनदि समृद्धौ ॥
1.71 चदि आह्लादे दीप्तौ च ॥
1.72 त्रदि चेष्टायाम् ॥
1.73 कदिऽ ॥
1.74 क्रदिऽ ॥
1.75 क्लदि आह्वाने रोदने च ॥
1.76 क्लिदि परिदेवने ॥
1.77 शुन्ध शुद्धौ ॥
1.78 शीकृ सेचने ॥
1.79 सीकृ इत्येके ॥
1.80 लोकृ दर्शने ॥
1.81 श्लोकृ सङ्घाते ॥
1.82 स्रोकृ इति पाठान्तरम् ॥
1.83 द्रेकृऽ ॥
1.84 ध्रेकृ शब्दोत्साहयोः ॥
1.85 रेकृ शङ्कायाम् ॥
1.86 सेकृऽ ॥
1.87 स्रेकृऽ ॥
1.88 स्रकिऽ ॥
1.89 श्रकिऽ ॥
1.90 श्लकि गतौ गत्यर्थाः ॥
1.91 शकि शङ्कायाम् ॥
1.92 अकि लक्षणे ॥
1.93 वकि कौटिल्ये ॥
1.94 मकि मण्डने ॥
1.95 कक लौल्ये ॥
1.96 कुकऽ ॥
1.97 वृक आदाने ॥
1.98 चक तृप्तौ प्रतिघाते च ॥
1.99 ककिऽ ॥
1.100 वकिऽ ॥
1.101 श्वकिऽ ॥
1.102 त्रकिऽ ॥
1.103 ढौकृऽ ॥
1.104 त्रौकृऽ ॥
1.105 ष्वस्कऽ ष्वष्कऽ ॥
1.106 वस्कऽ वष्कऽ ॥
1.107 मस्कऽ मष्क ॥
1.108 टिकृऽ ॥
1.109 टीकृऽ ॥
1.110 तिकृऽ ॥
1.111 तीकृऽ ॥
1.112 रघिऽ ॥
1.113 लघि गत्यर्थाः ॥
1.114 ष्वकि इत्येके तृतीयो दन्त्यादिरित्येके । लघि भोजननिवृत्तावपि ॥
1.115 अघिऽ ॥
1.116 वघिऽ ॥
1.117 मघि गत्याक्षेपे । गतौ गत्यारम्भे चेत्यपरे । मघि कैतवे च ॥
1.118 राघृऽ ॥
1.119 लाघृऽ ॥
1.120 द्राघृ सामर्थ्ये ॥
1.121 ध्राघृ इत्यपि केचित् । द्राघृ आयामे च ॥
1.122 श्लाघृ कत्थने । इति शीकादय उदात्ता अनुदात्तेतः ॥
1.123 फक्क निचैर्गतौ ॥
1.124 तक हसने ॥
1.125 तकि कृच्छ्रजीवने ॥
1.126 बुक्क भषणे ॥
1.127 शुक गतौ ॥
1.128 कख हसने ॥
1.129 ओखृऽ ॥
1.130 राखृऽ ॥
1.131 लाखृऽ ॥
1.132 द्राखृऽ ॥
1.133 ध्राखृ शोषणालमर्थयोः ॥
1.134 शाखृऽ ॥
1.135 श्लाखृ व्याप्तौ ॥
1.136 उखऽ ॥
1.137 उखिऽ ॥
1.138 वखऽ ॥
1.139 वखिऽ ॥
1.140 मखऽ ॥
1.141 मखिऽ ॥
1.142 णखऽ ॥
1.143 णखिऽ ॥
1.144 रखऽ ॥
1.145 रखिऽ ॥
1.146 लखऽ ॥
1.147 लखिऽ ॥
1.148 इखऽ ॥
1.149 इखिऽ ॥
1.150 ईखऽ ॥
1.151 ईखिऽ ॥
1.152 वल्गऽ ॥
1.153 रगिऽ ॥
1.154 लगिऽ ॥
1.155 अगिऽ ॥
1.156 वगिऽ ॥
1.157 मगिऽ ॥
1.158 तगिऽ ॥
1.159 त्वगिऽ ॥
1.160 त्रगिऽ ॥
1.161 श्रगिऽ श्वगिऽ ष्वगिऽ ॥
1.162 श्लगिऽ ॥
1.163 इगिऽ ॥
1.164 रिगिऽ ॥
1.165 लिगि गत्यर्थाः ॥
1.166 मुखिऽ ॥
1.167 थकिऽ ॥
1.168 रिखऽ ॥
1.169 रिखिऽ ॥
1.170 लिखऽ ॥
1.171 लिखिऽ ॥
1.172 त्रखऽ ॥
1.173 त्रिखिऽ ॥
1.174 शिखि इत्यपि केचित् । त्वगि कम्पने च ॥
1.175 युगिऽ ॥
1.176 जुगिऽ ॥
1.177 बुगि वर्जने ॥
1.178 वुगि इत्येके ॥
1.179 घघ हसने ॥
1.180 घग्घ इत्येके ॥
1.181 दघि पालने ॥
1.182 लघि शोषणे भाषायां दीप्तौ सीमातिक्रमे च ॥
1.183 मघि मण्डने ॥
1.184 शिघि आघ्राणे ॥
1.185 अर्घ मूल्ये । इति फक्कादय उदात्ता उदात्तेतः ॥
1.186 वर्च दीप्तौ ॥
1.187 षच सेचने सेवने च ॥
1.188 लोचृ दर्शने ॥
1.189 शच व्यक्तायां वाचि ॥
1.190 श्वचऽ ॥
1.191 श्वचि गतौ ॥
1.192 कच बन्धने ॥
1.193 कचिऽ ॥
1.194 काचि दीप्तिबन्धनयोः ॥
1.195 मचऽ ॥
1.196 मुचि कल्कने । कथन इत्यन्ये ॥
1.197 मचि धारणोच्छ्रायपूजनेषु ॥
1.198 पचि व्यक्तीकरणे ॥
1.199 ष्टुच प्रसादे ॥
1.200 ऋज गतिस्थानार्जनोपार्जनेषु ॥
1.201 ऋजिऽ ॥
1.202 भृजी भर्जने ॥
1.203 एजृऽ ॥
1.204 भ्रेजृऽ ॥
1.205 भ्राजृ दीप्तौ ॥
1.206 रेजृ दीप्तौ ॥
1.207 ईज गतिकुत्सनयोः ॥
1.208 ईजि इत्येके ॥
1.209 वीज गतौ । इति वर्चादय उदात्ता अनुदात्तेतः ॥
1.210 शुच शोके ॥
1.211 कुच शब्दे तारे ॥
1.212 कुञ्चऽ ॥
1.213 क्रुञ्च कौटिल्याल्पीभावयोः ॥
1.214 लुञ्च अपनयने ॥
1.215 अञ्चु गतिपूजनयोः ॥
1.216 वञ्चुऽ ॥
1.217 चञ्चुऽ ॥
1.218 तञ्चुऽ ॥
1.219 त्वञ्चुऽ ॥
1.220 म्रुञ्चुऽ ॥
1.221 म्लुञ्चुऽ ॥
1.222 म्रुचुऽ ॥
1.223 म्लुचु गत्यर्थाः ॥
1.224 ग्रुचुऽ ॥
1.225 ग्लुचुऽ ॥
1.226 कुजुऽ ॥
1.227 खुजु स्तेयकरणे ॥
1.228 ग्लुञ्चुऽ ॥
1.229 षस्ज षस्ज गतौ । षस्जिरात्मनेपद्यपि ॥
1.230 गुजऽ ॥
1.231 गुजि अव्यक्ते शब्दे ॥
1.232 अर्च पूजायाम् ॥
1.233 म्लेच्छ अव्यक्ते शब्दे ॥
1.234 लछऽ ॥
1.235 लाछि लक्षणे ॥
1.236 वाछि इच्छायाम् ॥
1.237 आछि आयामे ॥
1.238 ह्रीछ लज्जायाम् ॥
1.239 हुर्छा कौटिल्ये ॥
1.240 मुर्छा मोहसमुच्छ्राययोः । (मुर्च्छा ) ॥
1.241 स्फुर्छा विस्तृतौ ॥
1.242 युच्छ प्रमादे ॥
1.243 उछि उञ्छे ॥
1.244 उछी विवासे ॥
1.245 ध्रजऽ ॥
1.246 ध्रजिऽ ॥
1.247 व्रजऽ ॥
1.248 व्रजिऽ ॥
1.249 धृजऽ ॥
1.250 धृजिऽ ॥
1.251 ध्वजऽ ॥
1.252 ध्वजि गतौ ॥
1.253 ध्रिज च ॥
1.254 कूजऽ ॥
1.255 कूजि अव्यक्ते शब्दे ॥
1.256 अर्जऽ ॥
1.257 षर्ज अर्जने ॥
1.258 गर्ज शब्दे ॥
1.259 तर्ज भर्त्सने ॥
1.260 कर्ज व्यथने ॥
1.261 खर्ज पूजने च ॥
1.262 अज गतिक्षेपणयोः ॥
1.263 तेज पालने ॥
1.264 खज मन्थे ॥
1.265 कज मदे इत्येके ॥
1.266 खजि गतिवैकल्ये ॥
1.267 एजृ कम्पने ॥
1.268 टुओस्फूर्जा वज्रनिर्घोषे ॥
1.269 क्षि क्षये ॥
1.270 क्षीज अव्यक्ते शब्दे ॥
1.271 लजऽ ॥
1.272 लजि भर्जने ॥
1.273 लाजऽ ॥
1.274 लाजि भर्त्सने च ॥
1.275 जजऽ ॥
1.276 जजि युद्धे ॥
1.277 तुज हिंसायाम् ॥
1.278 तुजि पालने ॥
1.279 गजऽ ॥
1.280 गजिऽ ॥
1.281 गृजऽ ॥
1.282 गृजिऽ ॥
1.283 मुजऽ ॥
1.284 मुजि शब्दार्थाः । गज मदने च ॥
1.285 वजऽ ॥
1.286 व्रज गतौ । इति शुचादयः क्षिवर्जमुदात्ता उदात्तेतः ॥
1.287 अट्ट अतिक्रमणहिंसनयोः अतिक्रमहिंसयोः ॥
1.288 वेष्ट वेष्टने ॥
1.289 चेष्ट चेष्टायाम् ॥
1.290 गोष्टऽ ॥
1.291 लोष्ट सङ्घाते ॥
1.292 घट्ट चलने ॥
1.293 स्फुट विकसने ॥
1.294 अठि गतौ ॥
1.295 वठि एकचर्यायाम् ॥
1.296 मठिऽ ॥
1.297 कठि शोके ॥
1.298 मुठि पालने ॥
1.299 हेठ विबाधायाम् ॥
1.300 एठ च ॥
1.301 हिडि गत्यनादरयोः ॥
1.302 हुडि सङ्घाते ॥
1.303 कुडि दाहे ॥
1.304 वडि विभाजने ॥
1.305 मडि च ॥
1.306 भडि परिभाषणे ॥
1.307 पिडि सङ्घाते ॥
1.308 मुडि मार्जने ॥
1.309 तुडि तोडने ॥
1.310 हुडि वरणे । हरण इत्येके ॥
1.311 स्फुडि विकसने ॥
1.312 चडि कोपे ॥
1.313 शडि रुजायां सङ्घाते च ॥
1.314 तडि ताडने ॥
1.315 पडि गतौ ॥
1.316 कडि मदे ॥
1.317 खडि मन्थे ॥
1.318 हेडृऽ ॥
1.319 होडृ अनादरे ॥
1.320 बाडृ आप्लाव्ये ॥
1.321 वाडृ इत्येके ॥
1.322 द्राडृऽ ॥
1.323 ध्राडृ विशरणे ॥
1.324 शाडृ श्लाघायाम् । इत्यट्टादय उदात्ता अनुदात्तेतः ॥
1.325 शौटृ गर्वे ॥
1.326 यौटृ बन्धे ॥
1.327 म्रेटृऽ ॥
1.328 म्रेडृ उन्मादे ॥
1.329 म्लेटृ इत्येके ॥
1.330 कटे वर्षावरणयोः ॥
1.331 चटे इत्येके ॥
1.332 अटऽ ॥
1.333 पट गतौ ॥
1.334 रट परिभाषणे ॥
1.335 लट बाल्ये ॥
1.336 शट रुजाविशरणगत्यवसादनेषु ॥
1.337 वट वेष्टने ॥
1.338 किटऽ ॥
1.339 खिट त्रासे ॥
1.340 शिटऽ ॥
1.341 षिट अनादरे ॥
1.342 जटऽ ॥
1.343 झट सङ्घाते ॥
1.344 भट भृतौ ॥
1.345 तट उच्छ्राये ॥
1.346 खट काङ्क्षायाम् ॥
1.347 णट नट नृत्तौ ॥
1.348 पिट शब्दसङ्घातयोः ॥
1.349 हट दीप्तौ च ॥
1.350 षट अवयवे ॥
1.351 लुट विलोडने ॥
1.352 लुड इत्येके, डान्तोऽयमित्येके ॥
1.353 चिट परप्रैष्ये, परप्रेष्ये ॥
1.354 विट शब्दे ॥
1.355 बिट आक्रोशे ॥
1.356 हिट इत्येके ॥
1.357 इट इत्येके ॥
1.358 किट इत्येके ॥
1.359 कटी गतौ ॥
1.360 हेठ विबाधायाम् ॥
1.361 मडि भूषायाम् ॥
1.362 कुडि वैकल्ये ॥
1.363 कुटि इत्येके ॥
1.364 मुड इत्येके ॥
1.365 प्रुड मर्दने, प्रमर्दने ॥
1.366 मुट इत्येके ॥
1.367 पुट इत्येके ॥
1.368 चुडि अल्पीभावे ॥
1.369 मुडि खण्डने ॥
1.370 पुडि चेत्येके ॥
1.371 रुटि इत्येके ॥
1.372 लुटि स्तेये ॥
1.373 रुठि इत्येके ॥
1.374 लुठि इत्येके ॥
1.375 रुडि इत्येके ॥
1.376 लुडि इत्येके ॥
1.377 वटि विभाजने ॥
1.378 बटि इत्येके ॥
1.379 स्फुटि विशरणे, इत्येके ॥
1.380 स्फुटि इत्येके ॥
1.381 पठ व्यक्तायां वाचि ॥
1.382 वठ स्थौल्ये ॥
1.383 बठ इत्येके ॥
1.384 मठ मदनिवासयोः ॥
1.385 कठ कृच्छ्रजीवने ॥
1.386 रठ परिभाषणे ॥
1.387 रट इत्येके ॥
1.388 हठ प्लुतिशठत्वयोः, बलात्कार इत्यन्ये ॥
1.389 रुठ इत्येके ॥
1.390 लुठ इत्येके ॥
1.391 ऊठ उपघाते ॥
1.392 उठ इत्येके ॥
1.393 पिठ हिंसासङ्क्लेशनयोः ॥
1.394 शठ कैतवे च ॥
1.395 शुठ गतिप्रतिघाते, प्रतिघाते, इत्येके ॥
1.396 शुठि इत्येके ॥
1.397 कुठि च ॥
1.398 लुठि आलस्ये प्रतिघाते च ॥
1.399 शुठि शोषणे ॥
1.400 रुठि इत्येके ॥
1.401 लुठि गतौ ॥
1.402 चुड्ड चुद्ड, भावकरणे ॥
1.403 अड्ड अद्ड, अभियोगे ॥
1.404 कड्ड कद्ड, कार्कश्ये, चुड्डादयस्त्रयो दोपधाः ॥
1.405 क्रीडृ विहारे ॥
1.406 तुडृ तोडने ॥
1.407 तूडृ इत्येके ॥
1.408 हुडृ इत्येके ॥
1.409 हूडृ इत्येके ॥
1.410 होडृ गतौ ॥
1.411 रौडृ अनादरे ॥
1.412 रोडृ इत्येके ॥
1.413 लोडृ उन्मादे ॥
1.414 अड उद्यमे ॥
1.415 लड विलासे ॥
1.416 लल इत्येके, ईप्सायाम् ॥
1.417 कड मदे ॥
1.418 कडि इत्येके ॥
1.419 गडि वदनैकदेशे, इति शौट्रादय उदात्ता उदात्तेतः ॥
1.420 तिपृ इत्येके ॥
1.421 तेपृ इत्येके ॥
1.422 ष्टिपृ क्षरणार्थाः, आद्योऽनुदात्तः ॥
1.423 ष्टेपृ कम्पने च ॥
1.424 ग्लेपृ दैन्ये ॥
1.425 टुवेपृ कम्पने ॥
1.426 केपृ इत्येके ॥
1.427 गेपृ इत्येके ॥
1.428 ग्लेपृ च ॥
1.429 मेपृ इत्येके ॥
1.430 रेपृ इत्येके ॥
1.431 लेपृ गतौ ॥
1.432 हेपृ इत्येके ॥
1.433 धेपृ च ॥
1.434 त्रपूष् लज्जायाम् ॥
1.435 कपि चलने ॥
1.436 रबि इत्येके ॥
1.437 लबि इत्येके ॥
1.438 अबि शब्दे ॥
1.439 लबि अवस्रंसने च ॥
1.440 कबृ वर्णे ॥
1.441 क्लीबृ अधार्ष्ट्ये ॥
1.442 क्षीबृ मदे ॥
1.443 क्षीवृ इत्येके ॥
1.444 शीभृ कत्थने ॥
1.445 बीभृ इत्येके ॥
1.446 चीभृ च ॥
1.447 रेभृ शब्दे ॥
1.448 अभि इत्येके ॥
1.449 रभि क्वचित्पठ्येते इत्येके ॥
1.450 लभि च ॥
1.451 ष्टभि ॥
1.452 स्कभि प्रतिबन्धे ॥
1.453 जभी इत्येके ॥
1.454 जृभि गात्रविनामे ॥
1.455 शल्भ कत्थने ॥
1.456 वल्भ भोजने ॥
1.457 गल्भ धार्ष्ट्ये (Some have typo as धाष्टर्ये) ॥
1.458 श्रम्भु प्रमादे ॥
1.459 स्रम्भु इत्येके, दन्त्यादिश्च ॥
1.460 ष्टुभु स्तम्भे, इति तिपादयस्तिपिवर्जमुदात्ता अनुदात्तेतः ॥
1.461 गुपू रक्षणे ॥
1.462 धूप सन्तापे ॥
1.463 जप इत्येके ॥
1.464 जल्प व्यक्तायां वाचि, जप मानसे च ॥
1.465 चप सान्त्वने ॥
1.466 षप समवाये ॥
1.467 रप इत्येके ॥
1.468 लप व्यक्तायां वाचि ॥
1.469 चुप मन्दायां गतौ ॥
1.470 तुप इत्येके ॥
1.471 तुम्प इत्येके ॥
1.472 त्रुप इत्येके ॥
1.473 त्रुम्प इत्येके ॥
1.474 तुफ इत्येके ॥
1.475 तुम्फ इत्येके ॥
1.476 त्रुफ इत्येके ॥
1.477 त्रुम्फ हिंसार्थाः ॥
1.478 पर्प इत्येके ॥
1.479 रफ इत्येके ॥
1.480 रफि इत्येके ॥
1.481 अर्ब इत्येके ॥
1.482 पर्ब इत्येके ॥
1.483 लर्ब इत्येके ॥
1.484 बर्ब इत्येके ॥
1.485 मर्ब इत्येके ॥
1.486 कर्ब इत्येके ॥
1.487 खर्ब इत्येके ॥
1.488 गर्ब इत्येके ॥
1.489 शर्ब इत्येके ॥
1.490 षर्ब इत्येके ॥
1.491 चर्ब गतौ, अदने च ॥
1.492 कुबि आच्छादने, छादने ॥
1.493 लुबि इत्येके ॥
1.494 तुबि अर्दने ॥
1.495 चुबि वक्त्रसंयोगे ॥
1.496 षृभु इत्येके ॥
1.497 षृम्भु हिंसार्थौ ॥
1.498 षिभु इत्येके ॥
1.499 षिम्भु इत्येके ॥
1.500 शुभ इत्येके ॥
1.501 शुम्भ भाषने, भासन इत्येके ॥
1.502 घिणि इत्येके ॥
1.503 घुणि ग्रहणे ॥
1.504 घृणि ग्रहणे ॥
1.505 घुण घूर्ण भ्रमणे ॥
1.506 घूर्ण भ्रमणे ॥
1.507 पण व्यवहारे, स्तुतौ च ॥
1.508 पन च ॥
1.509 भाम क्रोधे ॥
1.510 क्षमूष् सहने ॥
1.511 कमु कान्तौ, इति घिण्यादय उदात्ता अनुदात्तेतः ॥
1.512 अण इत्येके ॥
1.513 रण इत्येके ॥
1.514 वण इत्येके ॥
1.515 भण इत्येके ॥
1.516 मण इत्येके ॥
1.517 कण इत्येके ॥
1.518 क्वण इत्येके ॥
1.519 व्रण ब्रण, भ्रण ॥
1.520 ध्वण शब्दार्थाः ॥
1.521 धण इत्यपि केचित् ॥
1.522 ओणृ अपनयने ॥
1.523 शोणृ वर्णगत्योः ॥
1.524 श्रोणृ सङ्घाते ॥
1.525 श्लोणृ च ॥
1.526 पैणृ गतिप्रेरणश्लेषणेषु ॥
1.527 प्रैणृ इत्यपि ॥
1.528 ध्रण शब्दे ॥
1.529 बण इत्यपि केचित् ॥
1.530 कनी दीप्तिकान्तिगतिषु ॥
1.531 ष्टन इत्येके ॥
1.532 वन शब्दे ॥
1.533 वन इत्येके ॥
1.534 षण सम्भक्तौ ॥
1.535 अम गत्यादिषु, गतौ शब्दे, सम्भक्तौ च ॥
1.536 द्रम इत्येके ॥
1.537 हम्म इत्येके ॥
1.538 मीमृ गतौ, मीमृ शब्दे च ॥
1.539 चमुऽ इत्येके ॥
1.540 छमुऽ इत्येके ॥
1.541 जमुऽ इत्येके ॥
1.542 झमु अदने ॥
1.543 जिमु इति केचित् ॥
1.544 क्रमु पादविक्षेपे, इत्यणादय उदात्ता उदात्तेतः ॥
1.545 अय इत्येके ॥
1.546 वय इत्येके ॥
1.547 पय इत्येके ॥
1.548 मय इत्येके ॥
1.549 चय इत्येके ॥
1.550 तय इत्येके ॥
1.551 णय गतौ, रक्षणे च ॥
1.552 दय दानगतिरक्षणहिंसादानेषु ॥
1.553 रय गतौ ॥
1.554 लय च ॥
1.555 ऊयी तन्तुसन्ताने ॥
1.556 पूयी विशरणे, दुर्गन्धे च ॥
1.557 क्नूयी शब्दे, उन्दे च ॥
1.558 क्ष्मायी विधूनने ॥
1.559 स्फायी इत्येके ॥
1.560 ओप्यायी वृद्धौ ॥
1.561 तायृ सन्तानपालनयोः ॥
1.562 शल चलनसंवरणयोः ॥
1.563 वल संवरणे, सञ्चलने च ॥
1.564 वल्ल इत्येके ॥
1.565 मल धारणे ॥
1.566 मल्ल धारणे ॥
1.567 भल परिभाषणहिंसादानेषु ॥
1.568 भल्ल परिभाषणहिंसादानेषु ॥
1.569 कल शब्दसङ्ख्यानयोः ॥
1.570 कल्ल अव्यक्ते शब्दे, अशब्द इत्येके ॥
1.571 तेवृ देवने ॥
1.572 देवृ देवने ॥
1.573 षेवृ इत्येके ॥
1.574 गेवृ इत्येके ॥
1.575 ग्लेवृ इत्येके ॥
1.576 पेवृ इत्येके ॥
1.577 मेवृ इत्येके ॥
1.578 म्लेवृ सेवने ॥
1.579 शेवृ इत्येके ॥
1.580 खेवृ इत्येके ॥
1.581 प्लेवृ इत्येके ॥
1.582 केवृ इत्येके ॥
1.583 रेवृ प्लवगतौ, इत्ययादय उदात्ता अनुदात्तेतः ॥
1.584 मव्य बन्धने ॥
1.585 षूर्क्ष्य इत्येके ॥
1.586 सूर्क्ष्य इत्येके ॥
1.587 ईर्क्ष्य इत्येके ॥
1.588 ईर्ष्य ईर्ष्यार्थाः ॥
1.589 हय गतौ ॥
1.590 शुच्य अभिषवे ॥
1.591 चुच्य इत्येके ॥
1.592 हर्य गतिकान्त्योः ॥
1.593 अल भूषणपर्याप्तिवारणेषु, अयं स्वरितेदित्येके ॥
1.594 ञिफला विशरणे ॥
1.595 मील इत्येके ॥
1.596 श्मील इत्येके ॥
1.597 स्मील इत्येके ॥
1.598 क्ष्मील निमेषणे ॥
1.599 पील प्रतिष्टम्भे ॥
1.600 णील वर्णे ॥
1.601 शील समाधौ ॥
1.602 कील बन्धने ॥
1.603 कूल आवरणे ॥
1.604 शूल रुजायां सङ्घाते च ॥
1.605 तूल निष्कर्षे ॥
1.606 पूल सङ्घाते ॥
1.607 मूल प्रतिष्ठायाम् ॥
1.608 फल निष्पत्तौ ॥
1.609 चुल्ल भावकरणे ॥
1.610 फुल्ल विकसने ॥
1.611 चिल्ल शैथिल्ये भावकरणे च ॥
1.612 तिल गतौ ॥
1.613 तिल्ल इत्येके ॥
1.614 वेलृऽ ॥
1.615 चेलृऽ ॥
1.616 केलृऽ ॥
1.617 खेलृऽ ॥
1.618 क्ष्वेलृऽ ॥
1.619 वेल्ल चलने ॥
1.620 वेह्ल इत्येके ॥
1.621 पेलृऽ पल्लऽ ॥
1.622 फेलृऽ ॥
1.623 शेलृ गतौ ॥
1.624 षेलृ इत्येके ॥
1.625 स्खल सञ्चलने ॥
1.626 खल सञ्चये च ॥
1.627 गल अदने भक्षणे स्रावे च ॥
1.628 षल गतौ ॥
1.629 दल विशरणे ॥
1.630 श्वलऽ ॥
1.631 श्वल्ल आशुगमने ॥
1.632 खोलृऽ ॥
1.633 खोरृ गतिप्रतिघाते ॥
1.634 धोरृ गतिचातुर्ये ॥
1.635 त्सर छद्मगतौ ॥
1.636 क्मर हूर्छने ॥
1.637 अभ्रऽ ॥
1.638 वभ्रऽ बभ्रऽ ॥
1.639 मभ्रऽ ॥
1.640 चर गत्यर्थाः । चरतिर्भक्षणर्थोऽपि चर भक्षणे च चरतिर्भक्षणेऽपि ॥
1.641 ष्ठिवु निरसने ॥
1.642 जि जये ॥
1.643 जीव प्राणधारणे ॥
1.644 पीवऽ ॥
1.645 मीवऽ ॥
1.646 तीवऽ ॥
1.647 णीव स्थौल्ये ॥
1.648 क्षिवुऽ ॥
1.649 क्षेवु निरसने ॥
1.650 उर्वीऽ ॥
1.651 तुर्वीऽ ॥
1.652 थुर्वीऽ ॥
1.653 दुर्वीऽ ॥
1.654 धुर्वी हिंसार्थाः ॥
1.655 गुर्वी उद्यमने ॥
1.656 मुर्वी बन्धने ॥
1.657 पुर्वऽ पूर्वऽ ॥
1.658 पर्वऽ ॥
1.659 मर्व पूरणे ॥
1.660 चर्व अदने ॥
1.661 भर्वऽ हिंसायाम् ॥
1.662 भर्ब इत्येके ॥
1.663 भर्भ इत्यन्ये ॥
1.664 कर्वऽ ॥
1.665 खर्वऽ ॥
1.666 गर्व दर्पे ॥
1.667 अर्वऽ ॥
1.668 शर्वऽ ॥
1.669 षर्व हिंसायाम् ॥
1.670 इवि व्याप्तौ ॥
1.671 पिविऽ ॥
1.672 मिविऽ ॥
1.673 णिवि सेचने । सेचने चेत्येके ॥
1.674 षिवि इत्येके । सेवन इति तरङ्गिण्याम् ॥
1.675 हिविऽ ॥
1.676 दिविऽ ॥
1.677 धिविऽ ॥
1.678 जिवि प्रीणनार्थाः ॥
1.679 रिविऽ ॥
1.680 रविऽ ॥
1.681 धवि गत्यर्थाः ॥
1.682 कृवि हिंसाकरणयोश्च ॥
1.683 मव बन्धने ॥
1.684 अव रक्षणगतिकान्तिप्रीतितृप्त्यवगमप्रवेशऽ श्रवणस्वाम्यर्थयाचनक्रियेच्छादीप्त्यवाप्त्यालिङ्गनहिंसादानभागवृद्धिषु ॥
1.685 धावु गतिशुद्ध्योः । उदात्तः स्वरितेत् ॥ अथोष्मान्ताः ॥
1.686 धुक्षऽ ॥
1.687 धिक्ष सन्दीपनक्लेशनजीवनेषु ॥
1.688 वृक्ष वरणे ॥
1.689 शिक्ष विद्योपादाने ॥
1.690 भिक्ष भिक्षायामलाभे लाभे च ॥
1.691 क्लेश अव्यक्तायां वाचि । बाधन इत्यन्ये इति दुर्गः ॥
1.692 दक्ष वृद्धौ शीघ्रार्थे च ॥
1.693 दीक्ष मौण्ड्येज्योपनयननियमव्रतादेशेषु ॥
1.694 ईक्ष दर्शने ॥
1.695 ईष गतिहिंसादर्शनेषु ॥
1.696 भाष व्यक्तायां वाचि ॥
1.697 वर्ष स्नेहने ॥
1.698 गेषृ अन्विच्छायाम् ॥
1.699 ग्लेषृ इत्येके ॥
1.700 पेषृ प्रयत्ने ॥
1.701 एषृ इत्येके ॥
1.702 येषृ इत्यन्ये ॥
1.703 जेषृऽ ॥
1.704 णेषृऽ ॥
1.705 एषृऽ ॥
1.706 प्रेषृ गतौ ॥
1.707 रेषृऽ ॥
1.708 हेषृऽ ॥
1.709 ह्रेषृ अव्यक्ते शब्दे ॥
1.710 कासृ शब्दकुत्सायाम् ॥
1.711 भासृ दीप्तौ ॥
1.712 णासृऽ ॥
1.713 रासृ शब्दे ॥
1.714 णस कौटिल्ये ॥
1.715 भ्यस भये ॥
1.716 आङः शसि इच्छायाम् ॥
1.717 ग्रसुऽ ॥
1.718 ग्लसु अदने ॥
1.719 ईह चेष्टायाम् ॥
1.720 बहिऽ ॥
1.721 महि वृद्धौ ॥
1.722 अहि गतौ ॥
1.723 गर्हऽ ॥
1.724 गल्ह कुत्सायाम् ॥
1.725 बर्हऽ ॥
1.726 बल्ह प्राधान्ये ॥
1.727 वर्हऽ ॥
1.728 वल्ह परिभाषणहिंसाच्छादनेषु ॥
1.729 प्लिह गतौ ॥
1.730 वेहृऽ बेहृऽ ॥
1.731 जेहृऽ ॥
1.732 बाहृऽ वाहृ प्रयत्ने । जेहृ गतावपि ॥
1.733 द्राहृ निद्राक्षये । निक्षेप इत्येके ॥
1.734 काश‍ृ दीप्तौ ॥
1.735 ऊह वितर्के ॥
1.736 गाहू विलोडने ॥
1.737 गृहू ग्रहणे ॥
1.738 ग्लह च अपादाने ॥
1.739 घुषि कान्तिकरणे ॥
1.740 घष इति केचित् । इति धुक्षादय उदात्ता अनुदात्तेतः ॥
1.741 घुषिर् अविशब्दने । शब्द इत्यन्ये पेठुः ॥
1.742 अक्षू व्याप्तौ ॥
1.743 तक्षूऽ ॥
1.744 त्वक्षू तनूकरणे ॥
1.745 उक्ष सेचने ॥
1.746 रक्ष पालने ॥
1.747 णिक्ष चुम्बने ॥
1.748 त्रक्षऽ ॥
1.749 ष्ट्रक्षऽ ॥
1.750 तृक्षऽ ॥
1.751 ष्टृक्षऽ ॥
1.752 णक्ष गतौ ॥
1.753 वक्ष रोषे । सङ्घात इत्येके ॥
1.754 मृक्ष सङ्घाते ॥
1.755 म्रक्ष इत्येके ॥
1.756 तक्ष त्वचने ॥
1.757 पक्ष परिग्रह इत्येके ॥
1.758 सूर्क्ष आदरे ॥
1.759 षर्क्ष इति केचित् ॥
1.760 काक्षिऽ ॥
1.761 वाक्षिऽ ॥
1.762 माक्षि काङ्क्षायाम् ॥
1.763 द्राक्षिऽ ॥
1.764 ध्राक्षिऽ ॥
1.765 ध्वाक्षि घोरवासिते च ॥
1.766 ध्माक्षि इत्येके ॥
1.767 चूष पाने ॥
1.768 तूष तुष्टौ ॥
1.769 पूष वृद्धौ ॥
1.770 मूष स्तेये ॥
1.771 लूषऽ ॥
1.772 रूष भूषायाम् ॥
1.773 शूष प्रसवे ॥
1.774 सूष इत्येके ॥
1.775 यूष हिंसायाम् ॥
1.776 जूष च ॥
1.777 भूषऽ ॥
1.778 तसि अलङ्कारे ॥
1.779 ऊष रुजायाम् ॥
1.780 ईष उञ्छे ॥
1.781 कषऽ ॥
1.782 खषऽ ॥
1.783 शिषऽ ॥
1.784 जषऽ ॥
1.785 झषऽ ॥
1.786 शषऽ ॥
1.787 वषऽ ॥
1.788 मषऽ ॥
1.789 रुषऽ ॥
1.790 रिष हिंसार्थाः ॥
1.791 भष भर्त्सने ॥
1.792 उष दाहे ॥
1.793 जिषुऽ ॥
1.794 विषुऽ ॥
1.795 मिषुऽ ॥
1.796 णिषु सेचने ॥
1.797 पुष पुष्टौ ॥
1.798 श्रिषुऽ ॥
1.799 श्लिषुऽ ॥
1.800 प्रुषुऽ ॥
1.801 प्लुषु दाहे ॥
1.802 पृषुऽ ॥
1.803 वृषुऽ ॥
1.804 मृषु सेचने। मृषु सहने च। इतरौ हिंसासङ्क्लेशनयोश्च ॥
1.805 घृषु सङ्घर्षे ॥
1.806 हृषु अलीके ॥
1.807 तुसऽ ॥
1.808 ह्रसऽ हृसऽ ॥
1.809 ह्लसऽ ॥
1.810 रस शब्दे ॥
1.811 लस श्लेषणक्रीडनयोः च ॥
1.812 घसॢ अदने ॥
1.813 जर्त्सऽ जर्जऽ जर्चऽ ॥
1.814 चर्चऽ ॥
1.815 झर्त्स झर्झ झर्ज परिभाषणहिंसातर्जनेषु ॥
1.816 पिसृऽ ॥
1.817 पेसृऽ ॥
1.818 विसऽ ॥
1.819 वेसऽ ॥
1.820 बिसऽ ॥
1.821 बेस गतौ ॥
1.822 हसे हसने ॥
1.823 णिश समाधौ ॥
1.824 मिशऽ ॥
1.825 मश शब्दे ॥
1.826 शव गतौ ॥
1.827 शश प्लुतगतौ ॥
1.828 शसु हिंसायाम् ॥
1.829 शंसु स्तुतौ। दुर्गतावपीत्येके इति दुर्गः ॥
1.830 चह परिकल्कने ॥
1.831 मह पूजायाम् ॥
1.832 रह त्यागे ॥
1.833 रहि गतौ ॥
1.834 दृहऽ ॥
1.835 दृहिऽ ॥
1.836 बृहऽ वृहऽ ॥
1.837 बृहि वृहि वृद्धौ। बृहि वृहि शब्दे च। बृहिर् वृहिर् इत्येके ॥
1.838 तुहिर्ऽ ॥
1.839 दुहिर्ऽ ॥
1.840 उहिर् अर्दने ॥
1.841 अर्ह पूजायाम्। इति घुषिरादय उदात्ता उदात्तेतः॥ अथ द्युतादयः ॥
1.842 द्युत दीप्तौ ॥
1.843 श्विता वर्णे ॥
1.844 ञिमिदा स्नेहने ॥
1.845 ञिष्विदा स्नेहनमोचनयोः गात्रप्रस्रवणे। स्नेहनमोहनयोरित्येके ॥
1.846 ञिक्ष्विदा चेत्येके ॥
1.847 रुच दीप्तावभिप्रीतौ च ॥
1.848 घुट परिवर्तने ॥
1.849 रुटऽ ॥
1.850 लुटऽ ॥
1.851 लुठ ॥
1.852 उठ उपघाते प्रतिघाते ॥
1.853 शुभ दीप्तौ ॥
1.854 क्षुभ सञ्चलने ॥
1.855 णभऽ ॥
1.856 तुभ हिंसायाम्। आद्योऽभावेऽपि ॥
1.857 स्रंसुऽ श्रंसुऽ श्रंशुऽ ॥
1.858 ध्वंसुऽ ॥
1.859 भ्रंसु अवस्रंसने। ध्वंसु गतौ च ॥
1.860 भ्रंशु इत्यपि केचित् तृतीय एव तालव्यान्त इत्यन्ये ॥
1.861 स्रम्भु विश्वासे ॥
1.862 वृतु वर्तने ॥
1.863 वृधु वृधौ ॥
1.864 शृधु शब्दकुत्सायाम् ॥
1.865 स्यन्दू प्रस्रवणे ॥
1.866 कृपू सामर्थ्ये। वृत्॥ इति द्युतादय उदात्ता अनुदात्तेतः॥ अथ घटादयो मितः ॥
1.867 घटम् चेष्टायाम् ॥
1.868 व्यथम् भयसञ्चलनयोः ॥
1.869 प्रथम् प्रख्याने ॥
1.870 प्रसम् विस्तारे ॥
1.871 म्रदम् मर्दने ॥
1.872 स्खदम् स्खदने ॥
1.873 क्षजिम् गतिदानयोः ॥
1.874 दक्षम् गतिहिंसनयोः गतिशासनयोः वृद्धौ शीघ्रार्थे च ॥
1.875 कृपम् कृपायां गतौ च ॥
1.876 क्रपम् इत्येके ॥
1.877 कपम् इत्यन्ये ॥
1.878 कदिम्ऽ ॥
1.879 क्रदिम्ऽ ॥
1.880 क्लदिम् वैक्लव्ये। वैकल्य इत्येके ॥
1.881 कदम्ऽ ॥
1.882 क्रदम्ऽ ॥
1.883 क्लदम् इत्यन्ये ॥
1.884 ञित्वराम् सम्भ्रमे। घटादयो मितः। इति घटादय उदात्ता अनुदात्तेतः ॥
1.885 ज्वरम् रोगे ॥
1.886 गडम् सेचने ॥
1.887 हेडम् वेष्टने ॥
1.888 वटम्ऽ ॥
1.889 भटम् परिभाषणे ॥
1.890 णटम् नृत्तौ। नतावित्येके। गतावित्यन्ये ॥
1.891 ष्टकम् प्रतिघाते प्रतीघाते ॥
1.892 चकम् तृप्तौ ॥
1.893 कखेम् हसने ॥
1.894 रगेम् शङ्कायाम् ॥
1.895 लगेम् सङ्गे ॥
1.896 ह्रगेम्ऽ ॥
1.897 ह्लगेम्ऽ ॥
1.898 षगेम्ऽ ॥
1.899 ष्ठगेम् संवरणे ॥
1.900 कगेम् नोच्यते। क्रियासामान्यार्थत्वात्। अनेकार्थत्वादित्यन्ये ॥
1.901 अकम्ऽ ॥
1.902 अगम् कुटिलायां गतौ ॥
1.903 कणम्ऽ ॥
1.904 रणम् गतौ ॥
1.905 चणम्ऽ ॥
1.906 शणम्ऽ ॥
1.907 श्रणम् दाने च । शणम् गतावित्यन्ये ॥
1.908 श्रथम्ऽ ॥
1.909 श्नथम्ऽ ॥
1.910 श्लथम्ऽ ॥
1.911 क्नथम्ऽ ॥
1.912 क्रथम्ऽ ॥
1.913 क्लथम् हिंसार्थाः ॥
1.914 चनम् च ॥
1.915 वनुम् च नोच्यते नोपलभ्यते ॥
1.916 ज्वलम् दीप्तौ ॥
1.917 ह्वलम्ऽ ॥
1.918 ह्मलम् सञ्चलने चलने ॥
1.919 स्मृम् आध्याने ॥
1.920 दृईम् भये ॥
1.921 नृईम् नये ॥
1.922 श्राम् पाके ॥
1.923 ॥ मारणतोषणनिशामनेषु ज्ञाम् । मारणतोषणनिशानेष्विति पाठान्तरम् ॥
1.924 ॥ कम्पने चलिः ॥
1.925 ॥ छदिर् ऊर्जने ॥
1.926 ॥ जिह्वोन्मथने लडिः ॥
1.927 ॥ मदीम् हर्षग्लेपनयोः ॥
1.928 ॥ ध्वनम् शब्दे ॥
1.929 ॥ दलिऽ ॥
1.930 ॥ वलिऽ ॥
1.931 ॥ स्खलिऽ ॥
1.932 ॥ रणिऽ ॥
1.933 ॥ ध्वनिऽ ॥
1.934 ॥ त्रपिऽ ॥
1.935 ॥ क्षपयश्च इति भोजः ॥
1.936 ॥ स्वनम् अवतंसने । घटादयो मितः ॥
1.937 ॥ जनीऽ ॥
1.938 ॥ जृईष्ऽ ॥
1.939 ॥ क्नसुऽ ॥
1.940 ॥ रञ्जोऽमन्ताश्च ॥
1.941 ॥ ज्वलऽ ॥
1.942 ॥ ह्वलऽ ॥
1.943 ॥ ह्मलऽ ॥
1.944 ॥ नमामनुपसर्गाद्वा ॥
1.945 ॥ ग्लाऽ ॥
1.946 ॥ स्नाऽ ॥
1.947 ॥ वनुऽ ॥
1.948 ॥ वमां च ॥
1.949 ॥ न कमिऽ ॥
1.950 ॥ अमिऽ ॥
1.951 ॥ चमाम् ॥
1.952 ॥ शमो दर्शने ॥
1.953 ॥ यमोऽपरिवेषणे ॥
1.954 ॥ स्खदिर् अवपरिभ्यां च ॥ अथ फणादयः ॥
1.955 फणम् गतौ गतिदीप्त्योः । वृत् । इति घटादयः फणान्ता मितः । इति ज्वरादय उदात्ता उदात्तेतः परस्मैभाषाः ॥
1.956 राजृ दीप्तौ । उदात्तः स्वरितेत् ॥
1.957 टुभ्राजृऽ ॥
1.958 टुभ्राश‍ृऽ ॥
1.959 टुभ्लाश‍ृ दीप्तौ । इत्युदात्ता अनुदात्तेतः ॥
1.960 स्यमुऽ ॥
1.961 स्वनऽ ॥
1.962 ध्वन शब्दे । फणादयो गताः ॥
1.963 षमऽ ॥
1.964 ष्टम अवैकल्ये वैकल्ये । वृत् । अथ ज्वलादयः ॥
1.965 ज्वल दीप्तौ ॥
1.966 चल कम्पने ॥
1.967 जल घातने ॥
1.968 टलऽ ॥
1.969 ट्वल वैकल्ये ॥
1.970 ष्ठल स्थाने ॥
1.971 हल विलेखने ॥
1.972 णल गन्धे । बन्धन इत्येके ॥
1.973 पल गतौ ॥
1.974 बल प्राणने धान्यावरोधे च धान्यावरोधने च ॥
1.975 पुल महत्त्वे ॥
1.976 कुल संस्त्याने बन्धुषु च ॥
1.977 शलऽ ॥
1.978 हुलऽ ॥
1.979 पतॢ गतौ ॥
1.980 हुल हिंसासंवरणयोश्च हिंसायां संवरणे च ॥
1.981 क्वथे निष्पाके ॥
1.982 पथे गतौ ॥
1.983 मथे विलोडने ॥
1.984 टुवम उद्गिरणे ॥
1.985 भ्रमु चलने ॥
1.986 क्षर सञ्चलने ॥
1.987 क्षुर सञ्चये । इति स्यमादय उदात्ता उदात्तेतः ॥
1.988 षह मर्षणे । उदात्तोऽनुदात्तेत् ॥
1.989 रमु क्रीडायाम् । रम इति माधवः । अनुदात्तोऽनुदात्तेत् ॥
1.990 षदॢ विशरणगत्यवसादनेषु ॥
1.991 शदॢ शातने ॥
1.992 क्रुश आह्वाने रोदने च । इति षदादयस्त्रयोऽनुदात्ता उदात्तेतः ॥
1.993 कुच सम्पर्चनकौटिल्यप्रतिष्टम्भविलेखनेषु ॥
1.994 बुध अवगमने ॥
1.995 रुह बीजजन्मनि प्रादुर्भावे च ॥
1.996 कस गतौ । इति कुचादय उदात्ता उदात्तेतो रुहिस्त्वनुदात्तः । वृत् । ज्वलादिर्गतः ॥
1.997 हिक्क अव्यक्ते शब्दे ॥
1.998 अञ्चु गतौ याचने च ॥
1.999 अचु इत्येके ॥
1.1000 अचि इत्येपरे ॥
1.1001 टुयाचृ याच्ञायाम् ॥
1.1002 रेटृ परिभाषणे ॥
1.1003 चतेऽ ॥
1.1004 चदे याचने च ॥
1.1005 प्रोथृ पर्याप्तौ ॥
1.1006 मिदृऽ ॥
1.1007 मेदृ मेधाहिंसनयोः ॥
1.1008 मिथृऽ ॥
1.1009 मेथृ इत्येके ॥
1.1010 मिधृ ॥
1.1011 मेधृ इत्यन्ये । मेधृ सङ्गमे च ॥
1.1012 णिदृऽ ॥
1.1013 णेदृ कुत्सासन्निकर्षयोः ॥
1.1014 श‍ृधुऽ ॥
1.1015 मृधु उन्दने ॥
1.1016 बुधिर् बोधने ॥
1.1017 उबुन्दिर् निशामने ॥
1.1018 वेणृ गतिज्ञानचिन्तानिशामनवादित्रग्रहणेषु ॥
1.1019 वेनृ इत्येके ॥
1.1020 खनु अवदारणे ॥
1.1021 चीवृ आदानसंवरणयोः ॥
1.1022 चीबृ इत्येके ॥
1.1023 चायृ पूजानिशामनयोः ॥
1.1024 व्यय गतौ ॥
1.1025 दाश‍ृ दाने ॥
1.1026 भेषृ भये । गतावित्येके ॥
1.1027 भ्रेषृऽ ॥
1.1028 भ्लेषृ गतौ ॥
1.1029 अस गतिदीप्त्यादानेषु ॥
1.1030 अष इत्येके ॥
1.1031 अय गतौ ॥
1.1032 स्पश बाधनस्पर्शनयोः ॥
1.1033 लष कान्तौ ॥
1.1034 चष भक्षणे ॥
1.1035 छष हिंसायाम् ॥
1.1036 झष आदानसंवरणयोः ॥
1.1037 भ्रक्षऽ ॥
1.1038 भ्लक्ष अदने ॥
1.1039 भक्ष इति मैत्रेयः ॥
1.1040 प्लक्ष च ॥
1.1041 दासृ दाने ॥
1.1042 माहृ माने ॥
1.1043 गुहू संवरणे । इति हिक्कादय उदात्ताः स्वरितेतः ॥ अथाजन्ताः ॥
1.1044 श्रिञ् सेवायाम् । उदात्त उभयतोभाषः ॥
1.1045 भृञ् भरणे ॥
1.1046 हृञ् हरणे ॥
1.1047 धृञ् धारणे ॥
1.1048 कृञ् करणे ॥
1.1049 णीञ् प्रापणे । इति भृञादयोऽनुदात्ता उभयतोभाषाः ॥
1.1050 धेट् पाने ॥
1.1051 ग्लैऽ ॥
1.1052 म्लै हर्षक्षये ॥
1.1053 द्यै न्यक्करणे ॥
1.1054 द्रै स्वप्ने ॥
1.1055 ध्रै तृप्तौ ॥
1.1056 ध्यै चिन्तायाम् ॥
1.1057 रै शब्दे ॥
1.1058 स्त्यैऽ ॥
1.1059 ष्ट्यै शब्दसङ्घातयोः ॥
1.1060 खै खदने ॥
1.1061 क्षैऽ ॥
1.1062 जैऽ ॥
1.1063 षै क्षये ॥
1.1064 कैऽ ॥
1.1065 गै शब्दे ॥
1.1066 शैऽ ॥
1.1067 श्रै पाके ॥
1.1068 स्रै इति केषुचित्पाठः ॥
1.1069 पैऽ ॥
1.1070 ओवै शोषणे ॥
1.1071 ष्टैऽ ॥
1.1072 ष्णै वेष्टने । शोभायां चेत्येके ॥
1.1073 दैप् शोधने ॥
1.1074 पा पाने ॥
1.1075 घ्रा गन्धोपादाने घ्राणे ॥
1.1076 ध्मा शब्दाग्निसंयोगयोः ॥
1.1077 ष्ठा गतिनिवृत्तौ ॥
1.1078 म्ना अभ्यासे ॥
1.1079 दाण् दाने ॥
1.1080 ह्वृ कौटिल्ये ॥
1.1081 स्वृ शब्दोपतापयोः ॥
1.1082 स्मृ चिन्तायाम् ॥
1.1083 द्वृ संवरणे वरणे ॥
1.1084 ह्वृ इत्येके ॥
1.1085 सृ गतौ ॥
1.1086 ऋ गतिप्रापणयोः ॥
1.1087 गृऽ ॥
1.1088 घृ सेचने ॥
1.1089 ध्वृ हूर्छने ॥
1.1090 स्रु गतौ ॥
1.1091 षु प्रसवसैश्वर्ययोः ॥
1.1092 श्रु श्रवणे ॥
1.1093 ध्रु स्थैर्ये ॥
1.1094 दुऽ ॥
1.1095 द्रु गतौ ॥
1.1096 जिऽ ॥
1.1097 ज्रि अभिभवे ॥
1.1098 जु इति सौत्रो धातुः गत्यर्थः । इति धयत्यादयोऽनुदात्ताः परस्मैभाषाः ॥
1.1099 ष्मिङ् ईषद्धसने ॥
1.1100 गुङ् अव्यक्ते शब्दे ॥
1.1101 गाङ् गतौ ॥
1.1102 उङ्ऽ ॥
1.1103 कुङ्ऽ ॥
1.1104 खुङ्ऽ ॥
1.1105 गुङ्ऽ ॥
1.1106 घुङ्ऽ ॥
1.1107 ङुङ् शब्दे ॥
1.1108 च्युङ्ऽ ॥
1.1109 ज्युङ्ऽ ॥
1.1110 जुङ्ऽ ॥
1.1111 प्रुङ्ऽ ॥
1.1111 रुङ् गतिरोषणयोः ॥
1.1111 धृङ् अवध्वंसने ॥
1.1111 श्यैङ् गतौ ॥
1.1112 प्लुङ् गतौ ॥
1.1112 मूङ् बन्धने ॥
1.1113 क्लुङ् इत्येके ॥
1.1113 गमॢऽ ॥
1.1114 त्यज हानौ ॥
1.1116 मेङ् प्रणिदाने ॥
1.1117 देङ् रक्षणे ॥
1.1119 प्यैङ् वृद्धौ ॥
1.1120 त्रैङ् पालने । इति ष्मिङ्प्रभृतयोऽनुदात्ता आत्मनेभाषाः ॥
1.1121 पूङ् पवने ॥
1.1123 डीङ् विहायसा गतौ । इति पूङादयस्त्रय उदात्ता आत्मनेभाषाः ॥
1.1124 तृई प्लवनतरणयोः । उदात्तः परस्मैभाषः ॥ अथ हलन्ताः ॥
1.1125 गुप गोपने ॥
1.1126 तिज निशाने ॥
1.1127 मान पूजायाम् ॥
1.1128 बध बन्धने । इति गुपादयश्चत्वार उदात्ता अनुदात्तेतः ॥
1.1129 रभ राभस्ये ॥
1.1130 डुलभष् प्राप्तौ ॥
1.1131 ष्वञ्ज परिष्वङ्गे ॥
1.1132 हद हद पुरीषोत्सर्गे । इति रभादयश्चत्वारोऽनुदात्ता अनुदात्तेतः ॥
1.1133 ञिक्ष्विदा अव्यक्ते शब्दे । उदात्त उदात्तेत् ॥
1.1134 स्कन्दिर् गतिशोषणयोः ॥
1.1135 यभ मैथुने विपरीतमैथुने ॥
1.1136 णम प्रह्वत्वे शब्दे च ॥
1.1138 सृपॢ गतौ ॥
1.1139 यम उपरमे ॥
1.1140 तप सन्तापे ॥
1.1142 षञ्ज सङ्गे ॥
1.1143 दृशिर् प्रेक्षणे ॥
1.1144 दंश दशने ॥
1.1145 कृष विलेखने ॥
1.1146 दह भस्मीकरणे ॥
1.1147 मिह सेचने । इति स्कन्दादयोऽनुदात्ता उदात्तेतः ॥
1.1148 कित निवासे रोगापनयने च । उदात्त उदात्तेत् ॥
1.1149 दान खण्डने अवखण्डने ॥
1.1150 शान तेजने अवतेजने । इत्युदात्तौ स्वरितेतौ ॥
1.1151 डुपचष् पाके ॥
1.1152 षच समवाये ॥
1.1153 भज सेवायाम् ॥
1.1154 रञ्ज रागे ॥
1.1155 शप आक्रोशे ॥
1.1156 त्विष दीप्तौ । अथ यजादयः ॥
1.1157 यज देवपूजासङ्गतिकरणदानेषु ॥
1.1158 डुवप टुवप बीजसन्ताने । छेदनेऽपि ॥
1.1159 वह प्रापणे । इति पचादयोऽनुदात्ताः स्वरितेतः षचिस्तूदात्तः ॥
1.1160 वस निवासे । उदात्तेदनुदात्तः ॥
1.1161 वेञ् तन्तुसन्ताने ॥
1.1162 व्येञ् संवरणे ॥
1.1163 ह्वेञ् स्पर्धायां शब्दे च । इति वेञादयस्त्रयोऽनुदात्ता उभयतोभाषाः ॥
1.1164 वद व्यक्तायां वाचि ॥
1.1165 ट्वोश्वि गतिवृद्ध्योः । वृत् ॥
2.1 अद भक्षणे ॥
2.2 हन हिंसागत्योः । इत्यनुदात्तावुदात्तेतौ ॥
2.3 द्विष अप्रीतौ ॥
2.4 दुह प्रपूरणे ॥
2.5 दिह उपचये ॥
2.6 लिह आस्वादने । इति द्विषादयोऽनुदात्ताः स्वरितेतः ॥
2.7 चक्षिङ् व्यक्तायां वाचि । अयं दर्शनेऽपि । अनुदात्तोऽनुदात्तेत् ॥
2.8 ईर गतौ कम्पने च ॥
2.9 ईड स्तुतौ ॥
2.10 ईश ऐश्वर्ये ॥
2.11 आस उपवेशने ॥
2.12 आङः शासु इच्छायाम् ॥
2.13 वस आच्छादने ॥
2.14 कसि गतिशासनयोः ॥
2.15 कस इत्येके ॥
2.16 कश इत्यन्ये इत्यपि ॥
2.17 णिसि चुम्बने ॥
2.18 णिजि शुद्धौ ॥
2.19 शिजि अव्यक्ते शब्दे ॥
2.20 पिजि वर्णे । सम्पर्चन इत्येके । उभयन्नेत्यन्ये । अवयव इत्यपरे । अव्यक्ते शब्द इतीतरे ॥
2.21 पृजि इत्येके ॥
2.22 वृजी वर्जने ॥
2.23 वृजि इत्येके ॥
2.24 पृची सम्पर्चने सम्पर्के । इतीरादय उदात्ता अनुदात्तेतः ॥
2.25 षूङ् प्राणिगर्भविमोचने ॥
2.26 शीङ् स्वप्ने । इत्युदात्तावात्मनेभाषौ ॥
2.27 यु मिश्रेणेऽभिश्रणे च ॥
2.28 रु शब्दे ॥
2.29 तु तु गतिवृद्धिहिंसासु वृद्ध्यर्थः । इति सौत्रो धातुः ॥
2.30 णु स्तुतौ ॥
2.31 टुक्षु शब्दे ॥
2.32 क्ष्णु तेजने ॥
2.33 ष्णु प्रस्रवणे । इति युप्रभृतय उदात्ताः परस्मैभाषाः ॥
2.34 ऊर्णुञ् आच्छादने । उदात्त उभयतोभाषः ॥
2.35 द्यु अभिगमने ॥
2.36 षु प्रसवैश्वर्ययोः ॥
2.37 कु शब्दे ॥
2.38 ष्टुञ् स्तुतौ । इति द्युप्रभृतयोऽनुदात्ताः परस्मैभाषाः । स्तौतिस्तूभयतोभाषः ॥
2.39 ब्रूञ् ब्रूञ् व्यक्तायां वाचि । उदात्त उभयतोभाषः ॥
2.40 इण् गतौ ॥
2.41 इङ् अध्ययने । नित्यमधिपूर्वः ॥
2.42 इक् स्मरणे । अयमप्यधिपूर्वः ॥
2.43 वी गतिप्रजनकान्त्यसनखादनेषु ॥
2.44 या प्रापणे ॥
2.45 वा गतिगन्धनयोः ॥
2.46 भा दीप्तौ ॥
2.47 ष्णा शौचे ॥
2.48 श्रा पाके ॥
2.49 द्रा कुत्सायां गतौ ॥
2.50 प्सा भक्षणे ॥
2.51 पा रक्षणे ॥
2.52 रा दाने ॥
2.53 ला आदाने दाने । द्वावपि दान इति चन्द्रः ॥
2.54 दाप् लवने ॥
2.55 ख्या प्रकथने ॥
2.56 प्रा पूरणे ॥
2.57 मा माने ॥
2.58 वच परिभाषणे । इण्प्रभृतयोऽनुदात्ताः परस्मभाषाः । इङ् त्वात्मनेभाषः ॥
2.59 विद ज्ञाने ॥
2.60 अस भुवि ॥
2.61 मृजू मृजूष् शुद्धौ । अथ रुदादयः ॥
2.62 रुदिर् अश्रुविमोचने । इति विदादय उदात्ता उदात्तेतः ॥
2.63 ञिष्वप शये । इत्युदात्तेदनुदात्तः ॥
2.64 श्वस प्राणने ॥
2.65 अन च । अथ जक्षित्यादयः ॥
2.66 जक्ष भक्ष्यहसनयोः । वृत् । इति रुदादयः ॥
2.67 जागृ निद्राक्षये ॥
2.68 दरिद्रा दुर्गतौ ॥
2.69 चकासृ दीप्तौ ॥
2.70 शासु अनुशिष्टौ । इति श्वसादय उदात्ता उदात्तेतः ॥ अथ छान्दसा धातवः ॥
2.71 दीधीङ् दीप्तिदेवनयोः ॥
2.72 वेवीङ् वेतिना तुल्ये । इत्युदात्तावात्मनेभाषौ । वृत् । इति जक्षित्यादयः ॥
2.73 षसऽ ॥
2.74 षस्ति सस्ति स्वप्ने ॥
2.75 वश कान्तौ । इति षसादय उदात्ता उदात्तेतः । चर्करीतं च ॥
2.76 ह्नुङ् अपनयने । अनुदात्त आत्मनेभाषः ॥ वृत् ॥ इति लुग्विकरणा अदादयः ॥ २॥ अथ जुहोत्यादयः ॥
3.1 हु दानादनयोः । आदाने चेत्येके । प्रीणनेऽपीति भाष्यम् ॥
3.2 ञिभी भये ॥
3.3 ह्री लज्जायाम् । इति जुहोत्यादयोऽनुदात्ता परस्मैभाषाः ॥
3.4 पृई पालनपूरणयोः ॥
3.5 पृ इत्येके ह्रस्वान्तोऽयमित्येके । उदात्तः परस्मैभाषः ॥
3.6 डुभृञ् धारणपोषणयोः । अनुदात्त उभयतोभाषः ॥
3.7 माङ् माने शब्दे च ॥
3.8 ओहाङ् गतौ । इत्यनुदात्तावात्मनेभाषौ ॥
3.9 ओहाक् त्यागे । अनुदात्तः परस्मैभाषः ॥
3.10 डुदाञ् दाने ॥
3.11 डुधाञ् धारणपोषणयोः । दान इत्यप्येके । इत्यनुदात्तावुभयतोभाषौ ॥
3.12 णिजिर् शौचपोषणयोः ॥
3.13 विजिर् पृथग्भावे ॥
3.14 विषॢ व्याप्तौ । इति णिजिरादयोऽनुदात्ताः स्वरितेतः ॥ अथागणान्ता एकादश छान्दसाः ॥
3.15 घृ क्षरणदीप्त्योः ॥
3.16 हृ प्रसह्यकरणे ॥
3.17 ऋऽ ॥
3.18 सृ गतौ । घृप्रभृतयोऽनुदात्ताः परस्मैभाषाः ॥
3.19 भस भर्त्सनदीप्त्योः । उदात्त उदात्तेत् ॥
3.20 कि ज्ञाने । अनुदात्तः परस्मैभाषः ॥
3.21 कित च ॥
3.22 तुर त्वरणे ॥
3.23 धिष शब्दे ॥
3.24 धन धान्ये ॥
3.25 जन जनने । इति तुरादय उदात्ता उदात्तेतः ॥
3.26 गा स्तुतौ । अनुदात्तः परस्मैभाषः । छन्दसि । वृत् । घृप्रभृतय एकादश छन्दसि । इयति भाषायामपि ॥ वृत् ॥ इति श्लुविकरणा जुहोत्यादयः ॥ ३॥ अथ दिवादयः ॥
4.1 दिवु क्रीडाविजिगीषाव्यवहारद्युतिस्तुतिमोदमदस्वप्नकान्तिगतिषु ॥
4.2 षिवु तन्तुसन्ताने ॥
4.3 स्रिवु गतिशोषणयोः ॥
4.4 ष्ठिवु निरसने । केचिदिहेमं न पठन्ति ॥
4.5 ष्णुसु अदने । आदान इत्येके । अदर्शन इत्यपरे ॥
4.6 ष्णसु निरसने ॥
4.7 क्नसु ह्वरणदीप्त्योः ॥
4.8 व्युष दाहे ॥
4.9 प्लुष च ॥
4.10 नृती गात्रविक्षेपे ॥
4.11 त्रसी उद्वेगे ॥
4.12 कुथ पूतीभावे ॥
4.13 पुथ हिंसायाम् ॥
4.14 गुध परिवेष्टने ॥
4.15 क्षिप प्रेरणे । अनुदात्तः ॥
4.16 पुष्प विकसने ॥
4.17 तिमऽ ॥
4.18 तीमऽ ॥
4.19 ष्टिमऽ ॥
4.20 ष्टीम आर्द्रीभावे ॥
4.21 व्रीड चोदने लज्जायां च ॥
4.22 इष गतौ ॥
4.23 षहऽ ॥
4.24 षुह चक्यर्थे ॥
4.25 जृईष्ऽ ॥
4.26 झृईष् वयोहानौ । इति दिवादय उदात्ता उदात्तेतः ॥ अथ स्वादय ओदितः ॥
4.27 ओषूङ् प्राणिप्रसवे ॥
4.28 ओदूङ् परितापे । इत्युदात्तावात्मनेभाषौ ॥
4.29 ओदीङ् क्षये ॥
4.30 ओडीङ् विहायसा गतौ ॥
4.31 ओधीङ् आधारे ॥
4.32 ओमीङ् हिंसायाम् ॥
4.33 ओरीङ् श्रवणे ॥
4.34 ओलीङ् श्लेषणे ॥
4.35 ओव्रीङ् वृणोत्यर्थे । वृत् । स्वादय ओदितः ॥
4.36 पीङ् पाने ॥
4.37 माङ् माने ॥
4.38 ईङ् गतौ ॥
4.39 प्रीङ् प्रीतौ प्रीणने । इति दीङादय आत्मनेभाषा अनुदात्ताः । दीङ् तूदात्तः ॥
4.40 शो तनूकरणे ॥
4.41 छो छेदने ॥
4.42 षो अन्तकर्मणि ॥
4.43 दो अवखण्डने । इति श्यतिप्रभृतयोऽनुदात्ताः परस्मैभाषाः ॥
4.44 जनी प्रादुर्भावे ॥
4.45 दीपी दीप्तौ ॥
4.46 पूरी आप्यायने ॥
4.47 तूरी गतित्वरणहिंसनयोः ॥
4.48 धूरीऽ ॥
4.49 गूरी हिंसागत्योः ॥
4.50 घूरीऽ ॥
4.51 जूरी हिंसावयोहन्योः ॥
4.52 शूरी हिंसास्तम्भनयोः हिंसस्तम्भयोः ॥
4.53 चूरी दाहे ॥
4.54 तप ऐश्वेर्ये वा ॥
4.55 वृतु वरणे वर्तने ॥
4.56 वावृतु इति केचित् ॥
4.57 क्लिश उपतापे ॥
4.58 काश‍ृ दीप्तौ ॥
4.59 वाश‍ृ शब्दे । इति जन्यादय उदात्ता अनुदात्तेतः । तपिस्त्वनुदात्तः ॥
4.60 मृष तितिक्षायाम् ॥
4.61 ईशुचिर् पूतीभावे । इत्युदात्तौ स्वरितेतौ ॥
4.62 णह बन्धने ॥
4.63 रञ्ज रागे ॥
4.64 शप आक्रोशे । इति णहादयस्त्रयोऽनुदात्ताः स्वरितेतः ॥
4.65 पद गतौ ॥
4.66 खिद दैन्ये ॥
4.67 विद सत्तायाम् ॥
4.68 बुध अवगमने ॥
4.69 युध सम्प्रहारे ॥
4.70 अनोरुध कामे ॥
4.71 अण प्राणने ॥
4.72 अन इत्येके ॥
4.73 मन ज्ञाने ॥
4.74 युज समाधौ ॥
4.75 सृज विसर्गे ॥
4.76 लिश अल्पीभावे। इति पदादयोऽनुदात्ता अनुदात्तेतः। अण् तूदात्तः ॥
4.77 राधोऽकर्मकाद्वृद्धावेव ॥
4.78 व्यध ताडने। अथ पुषादयः ॥
4.79 पुष पुष्टौ ॥
4.80 शुष शोषणे ॥
4.81 तुष प्रीतौ ॥
4.82 दुष वैकृत्ये ॥
4.83 श्लिष आलिङ्गने ॥
4.84 शक विभाषितो मर्षणे। स्वरितेत् ॥
4.85 ष्विदा गात्रप्रक्षरणे। ञिष्विदा इत्येके ॥
4.86 क्रुध क्रोधे कोपे ॥
4.87 क्षुध बुभुक्षायाम् ॥
4.88 शुध शौचे ॥
4.89 षिधु संराद्धौ। इति राधादयोऽनुदात्ता उदात्तेतः। अथ रधादय वेटः ॥
4.90 रध हिंसासंराद्ध्योः ॥
4.91 णश अदर्शने ॥
4.92 तृप प्रीणने ॥
4.93 दृप हर्षमोहनयोः ॥
4.94 द्रुह जिघांसायाम् ॥
4.95 मुह वैचित्त्ये ॥
4.96 ष्णुह उद्गिरणे ॥
4.97 ष्णिह प्रीतौ। वृत्। इति रधादयो वेट अनुदात्ता उदात्तेतः। अथ शमादयः ॥
4.98 शमु उपशमे ॥
4.99 तमु काङ्क्षायाम् ॥
4.100 दमु उपशमे ॥
4.101 श्रमु तपसि खेदे च ॥
4.102 भ्रमु अनवस्थाने ॥
4.103 क्षमू सहने ॥
4.104 क्लमु ग्लानौ ॥
4.105 मदी हर्षे। वृत्। इत्यष्टौ शमादय उदात्ता उदात्तेतः। क्षमू तु वेट् ॥
4.106 असु क्षेपने ॥
4.107 यसु प्रयत्ने ॥
4.108 जसु मोक्षने ॥
4.109 तसु उपक्षये ॥
4.110 दसु च ॥
4.111 वसु स्तम्भे ॥
4.112 बसु इत्येके बादिरित्येके ॥
4.113 भसु इति केचित् ॥
4.114 व्युष विभागे ॥
4.116 ब्युस इत्यन्ये ओष्ठ्यादिर्दन्त्यन्तो ब्युस इत्यन्ये ॥
4.117 बुस इत्यपरे अयकार बुस इत्यपरे ॥
4.118 वुस इति केचित् ॥
4.119 प्युषऽ ॥
4.120 प्युषऽ ॥
4.121 पुष च ॥
4.122 प्लुष दाहे ॥
4.123 विस प्रेरणे ॥
4.124 बिस इत्येके ॥
4.125 कुस संश्लेषणे श्लेषणे ॥
4.126 कुश इत्येके ॥
4.127 कुंस इत्यन्ये ॥
4.128 कुंश इत्यपरे ॥
4.129 बुस उत्सर्गे ॥
4.130 मुस खण्डने ॥
4.131 मसी परिमाने ॥
4.132 समी इत्येके ॥
4.133 लुट विलोडने ॥
4.134 लुठ इत्येके ॥
4.135 उच समवाये ॥
4.136 भृशुऽ ॥
4.137 भृंशुऽ ॥
4.138 भ्रंशु अधःपतने ॥
4.139 वृश वरणे ॥
4.140 कृश तनूकरणे ॥
4.141 ञितृष ञितृषा पिपासायाम् ॥
4.142 हृष तुष्टौ ॥
4.143 रुष रोषे ॥
4.144 रिष हिंसायाम् ॥
4.145 डिप क्षेपे ॥
4.146 कुप क्रोधे ॥
4.147 गुप व्याकुलत्वे ॥
4.148 युपऽ ॥
4.149 रुपऽ ॥
4.150 लुप विमोहने ॥
4.151 ष्टुप समुच्छ्राये ॥
4.152 ष्टूप इत्येके ॥
4.153 लुभ गार्द्ध्ये गार्ध्न्ये ॥
4.154 क्षुभ सञ्चलने ॥
4.155 व्युस इत्येके ॥
4.155 णभऽ ॥
4.156 तुभ हिंसायाम्। क्षुभिनभितुभयो द्युतादौ क्र्यादौ च पठ्यन्ते ॥
4.157 क्लिदू आद्रीभावे ॥
4.158 ञिमिदा स्नेहने ॥
4.159 ञिक्ष्विदा स्नेहनमोचनयोः ॥
4.160 ऋधु वृद्धौ ॥
4.161 गृधु अभिकाङ्क्षायाम्। इत्यसुप्रभृतय उदात्ता उदात्तेतः। वृत् ॥
5.1 षुञ् अभिषवे ॥
5.2 षिञ् बन्धने ॥
5.3 शिञ् निशाने ॥
5.4 डुमिञ् प्रक्षेपने ॥
5.5 चिञ् चयने ॥
5.6 स्तृञ् आच्छादने ॥
5.7 कृञ् हिंसायाम् ॥
5.8 वृञ् वरणे ॥
5.9 धुञ् कम्पने ॥
5.10 धूञ् इत्येके दीर्घन्तोऽपीत्येके। इति स्वादयो वृञ्वर्जमनुदात्ता उभयतोभाषाः ॥
5.11 टुदु उपतापे ॥
5.12 हि गतौ वृद्धौ च ॥
5.13 पृ प्रीतौ ॥
5.14 स्पृ प्रीतिपालनयोः। प्रीतिचलनयोरित्यन्ये ॥
5.15 स्मृ इत्येके। पृणोत्यादस्त्रयोऽपि छान्दसा इत्याहुः ॥
5.16 आपॢ व्याप्तौ ॥
5.17 शकॢ शक्तौ ॥
5.18 राधऽ ॥
5.19 साध संसिद्धौ। इति दुनोतिप्रभृतयोऽनुदात्ताः परस्मैभाषाः ॥
5.20 अशू व्याप्तौ सङ्घाते च ॥
5.21 ष्टिघ आस्कन्दने। इत्युदात्तावनुदात्तेतौ ॥
5.22 तिकऽ ॥
5.23 तिग गतौ च ॥
5.24 षघ हिंसायाम् ॥
5.25 ञिधृषा प्रागल्भ्ये ॥
5.26 दम्भु दम्भने दम्भे ॥
5.27 ऋधु वृद्धौ ॥
5.28 तृप प्रीणन इत्येके। छन्दसि। अथागणान्ताश्छान्दसाः ॥
5.29 अह व्याप्तौ ॥
5.30 दघ घातने पालने च ॥
5.31 चमु भक्षणे ॥
5.32 रिऽ ऋऽ ॥
5.33 क्षिऽ क्षीऽ ॥
5.34 चिरिऽ ॥
5.35 जिरिऽ ॥
5.36 दाशऽ ॥
5.37 दृई हिंसायाम्। क्षिर्भाषायामित्येके ॥
5.38 ऋऽ ॥
5.39 क्षी इत्येक एवाजादिरित्येके। रेफवानित्यन्ये। वृत् ॥
6.1 तुद व्यथने ॥
6.2 णुद प्रेरणे ॥
6.3 दिश अतिसर्जने ॥
6.4 भ्रस्ज पाके ॥
6.5 क्षिप प्रेरणे ॥
6.6 कृष विलेखने। इति तुदादयोऽनुदात्ताः स्वरितेतः ॥
6.7 ऋषी गतौ। उदात्त उदात्तेत् ॥
6.8 जुषी प्रीतिसेवनयोः ॥
6.9 ओविजी भयचलनयोः ॥
6.10 ओलजीऽ ॥
6.11 ओलस्जी व्रीडायाम् व्रीडे। इति जुषादय उदात्ता अनुदात्तेतः ॥
6.12 ओव्रश्चू छेदने ॥
6.13 व्यच व्याजीकरणे ॥
6.14 उछि उञ्छे ॥
6.15 उछी विवासे ॥
6.16 ऋछ गतीन्द्रियप्रलयमूर्तिभावेषु ॥
6.17 मिछ उत्क्लेशे ॥
6.18 जर्जऽ ॥
6.19 चर्चऽ ॥
6.20 झर्झ परिभाषणभर्त्सनयोः ॥
6.21 त्वच संवरणे ॥
6.22 ऋच स्तुतौ ॥
6.23 उब्ज आर्जवे ॥
6.24 उज्झऽ उद्झ उत्सर्गे ॥
6.25 लुभ विमोहने ॥
6.26 रिफ कत्थनयुद्धनिन्दाहिंसादानेषु ॥
6.27 रिह इत्येके ॥
6.28 तृपऽ ॥
6.29 तृम्पऽ तृप्तौ ॥
6.30 तृफऽ ॥
6.31 तृम्फ इत्येके ॥
6.32 तुपऽ ॥
6.33 तुम्पऽ ॥
6.34 तुफऽ ॥
6.35 तुम्फ हिंसायाम् ॥
6.36 दृपऽ ॥
6.37 दृम्प उत्क्लेशे ॥
6.38 दृफऽ ॥
6.39 दृम्फ इत्येके ॥
6.40 ऋफऽ ॥
6.41 ऋम्फ हिंसायाम् ॥
6.42 गुफऽ ॥
6.43 गुम्फ ग्रन्थे ॥
6.44 उभऽ ॥
6.45 उम्भ पूरणे ॥
6.46 शुभऽ ॥
6.47 शुम्भ शोभार्थे ॥
6.48 दृभी ग्रन्थे ॥
6.49 चृती हिंसाग्रन्थनयोः ॥
6.50 विध विधाने ॥
6.51 जुड गतौ ॥
6.52 जुन इत्येके ॥
6.53 मृड सुखने ॥
6.54 पृड च ॥
6.55 पृण प्रीणने ॥
6.56 वृण च ॥
6.57 मृण हिंसायाम् ॥
6.58 तुण कौटिल्ये ॥
6.59 पुण कर्मणि शुभे ॥
6.60 मुण प्रतिज्ञाने ॥
6.61 कुण शब्दोपकरणयोः शब्दोपतापयोः ॥
6.62 शुन गतौ ॥
6.63 द्रुण हिंसागतिकौटिल्येषु ॥
6.64 घुणऽ ॥
6.65 घूर्ण भ्रमणे ॥
6.66 षुर ऐश्वर्यदीप्त्योः ॥
6.67 कुर शब्दे ॥
6.68 खुर छेदने ॥
6.69 मुर संवेष्टने सञ्चेष्टने ॥
6.70 क्षुर विलेखने ॥
6.71 घुर भीमार्थशब्दयोः ॥
6.72 पुर अग्रगमने ॥
6.73 वृहू उद्यमने ॥
6.74 बृहू इत्येके ॥
6.75 तृहूऽ ॥
6.76 स्तृहूऽ ॥
6.77 तृंहू हिंसार्थाः ॥
6.78 इष इषु इच्छायाम् ॥
6.79 मिष स्पर्धायाम् ॥
6.80 किल श्वैत्यक्रीडनयोः श्वैत्ये ॥
6.81 तिल स्नेहने स्नेहे ॥
6.82 चिल वसने ॥
6.83 चल विलसने ॥
6.84 इल स्वप्नक्षेपनयोः ॥
6.85 विल संवरणे ॥
6.86 बिल भेदने ॥
6.87 णिल गहने ॥
6.88 हिल भावकरणे ॥
6.89 शिलऽ ॥
6.90 षिल उञ्छे ॥
6.91 मिल श्लेषणे ॥
6.92 लिख अक्षरविन्यासे ॥
6.93 कुट कौटिल्ये ॥
6.94 पुट संश्लेषणे ॥
6.95 कुच सङ्कोचने ॥
6.96 गुज शब्दे ॥
6.97 गुड रक्षायाम् ॥
6.98 डिप क्षेपे ॥
6.99 छुर छेदने ॥
6.100 स्फुट विकसने ॥
6.101 मुट आक्षेपप्रमर्दनयोः ॥
6.102 त्रुट छेदने ॥
6.103 तुट कलहकर्मणि ॥
6.104 चुटऽ ॥
6.105 छुट छेदने ॥
6.106 जुड बन्धने ॥
6.107 जुट इत्येके ॥
6.108 कड मदे ॥
6.109 लुट संश्लेषणे ॥
6.110 लुठ इत्येके ॥
6.111 लुड इत्यन्ये ॥
6.112 कृड घनत्वे ॥
6.113 कुड बाल्ये ॥
6.114 पुड उत्सर्गे ॥
6.115 घुट प्रतिघाते ॥
6.116 तुड तोडने । ६.११৭ थुडऽ ॥
6.118 स्थुड संवरणे ॥
6.119 खुडऽ ॥
6.120 छुड इत्येके ॥
6.121 स्फुरऽ ॥
6.122 स्फुल सञ्चलने । स्फुर स्फुरणे । स्फुल सञ्चलन इत्येके ॥
6.123 स्फरऽ ॥
6.124 स्फल इत्यन्ये ॥
6.125 स्फुडऽ ॥
6.126 चुडऽ ॥
6.127 व्रुड संवरणे ॥
6.128 क्रुडऽ ॥
6.129 भृड निमज्जने इत्येके ॥
6.130 हुड सङ्घाते । इति व्रश्चादय उदात्ता उदात्तेतः ॥
6.131 गुरी उद्यमने । उदात्त अनुदात्तेत् ॥
6.132 णू णु स्तुतौ ॥
6.133 धू धु विधूनने । इत्युदात्तौ परस्मैभाषौ ॥
6.134 गु पुरीषोत्सर्गे ॥
6.135 ध्रु गतिस्थैर्ययोः । ध्रुव इत्येके । इत्यनुदात्तौ परस्मैभाषौ ॥
6.136 कुङ् शब्दे ॥
6.137 कूङ् इत्येके दीर्घान्त इति कैयटादयः । ह्रस्वान्त इति न्यासः । उदात्त आत्मनेभाषः । वृत् । कुटादयो गताः ॥
6.138 पृङ् व्यायामे ॥
6.139 मृङ् प्राणत्यागे । इत्यनुदात्तावात्मनेभाषौ ॥
6.140 रिऽ ॥
6.141 पि गतौ ॥
6.142 धि धारणे ॥
6.143 क्षि निवासगत्योः । इति रियत्यादयोऽनुदात्ताः परस्मैभाषाः ॥
6.144 षू प्रेरणे ॥
6.145 कृई विक्षेपे निक्षेपे ॥
6.146 गृई निगरणे । इत्युदात्ताः परस्मैभाषाः ॥
6.147 दृङ् आदरे ॥
6.148 धृङ् अवस्थाने । इत्यनुदात्तावात्मनेभाषौ ॥
6.149 प्रछ ज्ञीप्सायाम् । वृत् । किरादयो वृत्ताः ॥
6.150 सृज विसर्गे ॥
6.151 टुमस्जो शुद्धौ ॥
6.152 रुजो भङ्गे ॥
6.153 भुजो कौटिल्ये ॥
6.154 छुप स्पर्शे ॥
6.155 रुशऽ ॥
6.156 रिश हिंसायाम् ॥
6.157 लिश गतौ ॥
6.158 स्पृश संस्पर्शने ॥
6.159 विछ गतौ ॥
6.160 विश प्रवेशने ॥
6.161 मृश आमर्शणे ॥
6.162 णुद प्रेरणे ॥
6.163 षदॢ विशरणगत्यवसादनेषु ॥
6.164 शदॢ शातने। इति पृच्छत्यादयोऽनुदात्ता उदात्तेतः। विछिस्तूदात्तः ॥
6.165 मिल सङ्गमे सङ्गमने। उदात्तः स्वरितेत्। अथ मुचादयः ॥
6.166 मुचॢ मोक्षणे मोचने ॥
6.167 लुपॢ छेदने ॥
6.168 विदॢ लाभे ॥
6.169 लिप उपदेहे ॥
6.170 षिच क्षरणे। इति मुचादयोऽनुदात्ताः स्वरितेतः। विन्दतिस्तूदात्तः ॥
6.171 कृती छेदने। उदात्त उदात्तेत् ॥
6.172 खिद परिघाते परिघातने ॥
6.173 पिश अवयवे। अयं दीपनायामपि। इत्युदात्ता उदात्तेतः। खिदिस्त्वनुदात्तः। वृत्। मुचादयो वृत्ताः। वृत्। इति शविकरणास्तुदादयः। ६ ॥
7.1 रुधिर् आवरणे ॥
7.2 भिदिर् विदारणे ॥
7.3 छिदिर् द्वैधीकरणे ॥
7.4 रिचिर् विरेचने ॥
7.5 विचिर् पृथग्भावे ॥
7.6 क्षुदिर् सम्प्रेषणे ॥
7.7 युजिर् योगे। इति रुधादयोऽनुदात्ताः स्वरितेतः ॥
7.8 उछृदिर् दीप्तिदेवनयोः ॥
7.9 उतृदिर् हिंसानादरयोः। इत्युदात्तौ स्वरितेतौ ॥
7.10 कृती वेष्टने। उदात्त उदात्तेत् ॥
7.11 ञिऽइन्धी दीप्तौ। उदात्तोऽनुदात्तेत् ॥
7.12 खिद दैन्ये ॥
7.13 विद विचारणे। इत्यनुदात्तावनुदात्तेतौ ॥
7.14 शिषॢ विशेषणे ॥
7.15 पिषॢ सञ्चूर्णने ॥
7.16 भञ्जो आमर्दने ॥
7.17 भुज पालनाभ्यवहारयोः। इति शिषादयोऽनुदात्ता उदात्तेतः ॥
7.18 तृह हिंसायाम् ॥
7.19 हिसि हिंसायाम् ॥
7.20 उन्दी क्लेदने ॥
7.21 अञ्जू व्यक्तिम्रक्षणकान्तिगतिषु व्यक्तिमर्षणकान्तिगतिषु ॥
7.22 तञ्चू सङ्कोचने ॥
7.23 ओविजी भयचलनयोः ॥
7.24 वृजी वर्जने ॥
7.25 पृची सम्पर्के। इति तृहादय उदात्ता उदात्तेतः। वृत्। इति श्नम्विकरणा रुधादयः। ७ ॥
8.1 तनु विस्तारे ॥
8.2 षणु दाने ॥
8.3 क्षणु हिंसायाम् ॥
8.4 क्षिणु च ॥
8.5 ऋणु गतौ ॥
8.6 तृणु अदने ॥
8.7 घृणु दीप्तौ। इति तनादय उदात्तः स्वरितेतः ॥
8.8 वनु वनु याचने। अयं चन्द्रमते परस्मैपदी ॥
8.9 मनु अवबोधने। इत्यनुदात्तावुदात्तेतौ ॥
8.10 डुकृञ् करणे। अनुदात्त उभयतोभाषः। वृत्। इत्युविकरणास्तनादयः। ८ ॥
9.1 डुक्रीञ् द्रव्यविनिमये ॥
9.2 प्रीञ् तर्पने कान्तौ च ॥
9.3 श्रीञ् पाके ॥
9.4 मीञ् हिंसायाम् बन्धने माने ॥
9.5 षिञ् बन्धने ॥
9.6 स्कुञ् आप्रवने ॥
9.7 स्तम्भुऽ ॥
9.8 स्तुम्भुऽ ॥
9.9 स्कम्भुऽ ॥
9.10 स्कुम्भु रोधन इत्येके। प्रथमतृतीयौ स्तम्भ इति माधवः। द्वितीयो निष्कोषणे चतुर्थो धारण इत्यन्ये। चत्वार इमे परस्मैपदिनः सौत्राश्च ॥
9.11 युञ् बन्धने। इति क्र्यादयोऽनुदात्ता उभयतोभाषाः ॥
9.12 क्नूञ् शब्दे ॥
9.13 द्रूञ् हिंसायाम् ॥
9.14 पूञ् पवने ॥
9.15 मूञ् बन्धने ॥
9.16 लूञ् छेदने ॥
9.17 स्तृईञ् आच्छादने ॥
9.18 कृईञ् हिंसायाम् ॥
9.19 वृईञ् वरणे ॥
9.20 धूञ् कम्पने। इति क्नूञ्प्रभृतय उदात्ता उभयतोभाषाः ॥
9.21 श‍ृई हिंसायाम् ॥
9.22 पृई पालनपूरणयोः ॥
9.23 वृई वरणे। भरण इत्येके ॥
9.24 भृई भर्त्सने। भरनेऽप्येके ॥
9.25 मृई हिंसायाम् ॥
9.26 दृई विदारणे ॥
9.27 जृई वयोहानौ ॥
9.28 झृई इत्येके ॥
9.29 धृई इत्यन्ये ॥
9.30 नृई नये ॥
9.31 कृई हिंसायाम् ॥
9.32 ऋई गतौ ॥
9.33 गृई शब्दे । इति शृणातिप्रभृतय उदात्ता उदात्तेतः ॥
9.34 ज्या वयोहानौ ॥
9.35 री गतिरेषणयोः ॥
9.36 ली श्लेषणे ॥
9.37 व्ली वरणे ॥
9.38 ब्ली इत्येके ॥
9.39 प्ली गतौ । वृत् । इति ल्वादयः प्वादयश्च ॥
9.40 व्री वरणे ॥
9.41 भ्री भये । भरण इत्येके ॥
9.42 क्षीष् हिंसायाम् ॥
9.43 ज्ञा अवबोधने ॥
9.44 बन्ध बन्धने । इति ज्यादयोऽनुदात्ताः परस्मैभाषाः ॥
9.45 वृङ् सम्भक्तौ । उदात्त आत्मनेभाषः ॥
9.46 श्रन्थ विमोचनप्रतिहर्षयोः ॥
9.47 मन्थ विलोडने ॥
9.48 श्रन्थऽ ॥
9.49 ग्रन्थ सन्दर्भे ॥
9.50 कुन्थ संश्लेषणे ॥
9.51 मृद क्षोदे ॥
9.52 मृड सुखे च मृड च । अयं सुखेऽपि ॥
9.53 गुध रोषे ॥
9.54 कुष निष्कर्षे ॥
9.55 क्षुभ सञ्चलने ॥
9.56 णभऽ ॥
9.57 तुभ हिंसायाम् ॥
9.58 क्लिशू विबाधने ॥
9.59 अश भोजने ॥
9.60 उध्रस उञ्छे ॥
9.61 इष आभीक्ष्ण्ये ॥
9.62 विष विप्रयोगे ॥
9.63 प्रुषऽ ॥
9.64 प्लुष स्नेहनसेवनपूरणेषु ॥
9.65 पुष पुष्टौ ॥
9.66 मुष स्तेये ॥
9.67 खच भूतप्रादुर्भावे ॥
9.68 खव इत्येके ॥
9.69 हेठ च ॥
9.70 हेढ इत्येके । इति श्रन्थादय उदात्ता उदात्तेतः । क्लिशिस्तु वेट् । विषिस्त्वनुदात्तः ॥
9.71 ग्रह उपादाने । उदात्तः स्वरितेत् ॥ वृत् ॥ इति श्नाविकरणा क्र्यादयः ॥
10.1 चुर स्तेये ॥
10.2 चिति स्मृत्याम् ॥
10.3 यत्रि सङ्कोचने ॥
10.4 स्फुडि परिहासे ॥
10.5 स्फुटि इत्येके इत्यपि ॥
10.6 लक्ष दर्शनाङ्कनयोः ॥
10.7 कुद्रि अनृतभाषणे ॥
10.8 कुदृ इत्येके ॥
10.9 कुडि इत्यपरे ॥
10.10 लड उपसेवायाम् ॥
10.11 मिदि स्नेहने ॥
10.12 मिद इत्येके अयमनिदिदिति क्षीरस्वामिकौशिकौ ॥
10.13 ओलडि उत्क्षेपने ॥
10.14 ओलडि इत्येके ओकारो धात्ववयव इत्येके । नेत्यपरे । उलडि इत्यन्ये ॥
10.15 जल अपवारणे ॥
10.16 लज इत्येके ॥
10.17 पीड अवगाहने ॥
10.18 नट अवस्यन्दने ॥
10.19 श्रथ प्रयत्ने । प्रस्थान इत्येके ॥
10.20 बध संयमने ॥
10.21 बन्ध इति चान्द्राः ॥
10.22 पृई पूरणे ॥
10.23 ऊर्ज बलप्राणनयोः ॥
10.24 पक्ष परिग्रहे ॥
10.25 वर्णऽ ॥
10.26 चूर्ण प्रेरणे । वर्ण वर्णन इत्येके ॥
10.27 प्रथ प्रख्याने ॥
10.28 पृथ प्रक्षेपे ॥
10.29 पथ इत्येके ॥
10.30 षम्ब सम्बन्धने ॥
10.31 शम्ब च ॥
10.32 साम्ब इत्येके ॥
10.33 भक्ष अदने ॥
10.34 कुट्ट छेदनभर्त्सनयोः ॥
10.35 पुट्टऽ ॥
10.36 चुट्ट अल्पीभावे ॥
10.37 अट्टऽ ॥
10.38 षुट्ट अनादरे ॥
10.39 लुण्ट स्तेये ॥
10.40 लुण्ठ इति केचित् ॥
10.41 शठऽ ॥
10.42 श्वठ असंस्कारगत्योः ॥
10.43 श्वठि इत्येके ॥
10.44 तुजऽ ॥
10.45 तुजिऽ ॥
10.46 पिजऽ ॥
10.47 पिजिऽ ॥
10.48 लजिऽ ॥
10.49 लुजि हिंसाबलादाननिकेतनेषु ॥
10.50 पिस गतौ ॥
10.51 षान्त्व सामप्रयोगे ॥
10.52 शान्त्व इत्येके ॥
10.53 श्वल्कऽ ॥
10.54 वल्क परिभाषणे ॥
10.55 ष्णिह स्नेहने ॥
10.56 स्फिट इत्येके ॥
10.57 स्मिट अनादरे ॥
10.58 ष्मिङ् इत्येके ॥
10.59 श्लिष श्लेषणे ॥
10.60 पथि गतौ ॥
10.61 पिछ कुट्टने ॥
10.62 छदि संवरणे ॥
10.63 श्रण दाने ॥
10.64 तड आघाते ॥
10.65 खडऽ ॥
10.66 खडिऽ ॥
10.67 कडि खण्डने भेदने ॥
10.68 कुडि रक्षणे ॥
10.69 गुडि वेष्टने च । रक्षण इत्येके ॥
10.70 कुठि इत्यन्ये ॥
10.71 गुठि इत्यपरे ॥
10.72 खुडि खण्डने ॥
10.73 वटि विभाजने ॥
10.74 वडि इत्येके इति केचित् ॥
10.75 चडि कोपे । चण्ड इत्यन्ये ॥
10.76 मडि भूषायां हर्षे च ॥
10.77 भडि कल्याणे ॥
10.78 छर्द वमने ॥
10.79 पुस्तऽ ॥
10.80 बुस्त आदरानादरयोः ॥
10.81 चुद सञ्चोदने ॥
10.82 नक्कऽ ॥
10.83 धक्क नाशने ॥
10.84 चक्कऽ ॥
10.85 चुक्क व्यथने ॥
10.86 क्षल शौचकर्मणि ॥
10.87 तल प्रतिष्ठायाम् ॥
10.88 तुल उन्माने ॥
10.89 दुल उत्क्षेपे ॥
10.90 पुल महत्त्वे ॥
10.91 चुल समुच्छ्राये ॥
10.92 मूल रोहने ॥
10.93 कलऽ ॥
10.94 विल क्षेपे ॥
10.95 बिल भेदने ॥
10.96 तिल स्नेहने ॥
10.97 चल भृतौ ॥
10.98 पाल रक्षणे ॥
10.99 पल इत्येके ॥
10.100 लूष हिंसायाम् ॥
10.101 शुल्ब माने ॥
10.102 शूर्प च ॥
10.103 चुट छेदने ॥
10.104 मुट सञ्चूर्णने ॥
10.105 पिशऽ ॥
10.106 पडिऽ ॥
10.107 पसि नाशने ॥
10.108 पशि इत्येके ॥
10.109 व्रज मार्गसंस्कारगत्योः ॥
10.110 शुल्क अतिसर्जने अतिस्पर्शने ॥
10.111 चपि गत्याम् ॥
10.112 क्षपि क्षान्त्याम् ॥
10.113 क्षजि कृच्छ्रजीवने ॥
10.114 छजि इत्येके ॥
10.115 श्वर्त गत्याम् ॥
10.116 स्वर्त इत्येके ॥
10.117 श्वभ्र च । अथ ज्ञपादयो मितः ॥
10.118 ज्ञपम् ज्ञप ज्ञानज्ञापनमारणतोषणनिशाननिशामनेषु । मिच्चेत्येके ॥
10.119 यमम् यम च परिवेषणे । चान्मित् ॥
10.120 चहम् परिकल्पने ॥
10.121 चपम् इत्येके ॥
10.122 रहम् त्यागे ॥
10.123 बलम् प्राणने ॥
10.124 चिञ्म् चयने । वृत् । नान्ये मितोऽहेतौ ॥
10.125 घट्ट चलने ॥
10.126 मुस्त सङ्घाते ॥
10.127 खट्ट संवरणे ॥
10.128 षट्टऽ ॥
10.129 स्फिट्टऽ ॥
10.130 चुबि हिंसायाम् ॥
10.131 पूल सङ्घाते ॥
10.132 पूर्ण इत्येके ॥
10.133 पुण इत्यन्ये ॥
10.134 पुंस अभिवर्धणे ॥
10.135 टकि बन्धने ॥
10.136 व्यप क्षेपे ॥
10.137 व्ययऽ ॥
10.138 विपऽ चेत्येके ॥
10.139 धूस कान्तिकरणे ॥
10.140 धूष इत्येके मूर्धन्यान्त इत्येके ॥
10.141 धूश इत्यपरे तालव्यान्त इत्यन्ये ॥
10.142 कीट वर्णे वरणे ॥
10.143 चूर्ण सङ्कोचने ॥
10.144 पूज पूजायाम् ॥
10.145 अर्क स्तवने ॥
10.146 शुठ आलस्ये ॥
10.147 शुठि शोषणे ॥
10.148 जुड प्रेरणे ॥
10.149 गजऽ ॥
10.150 मार्ज शब्दार्थौ ॥
10.151 मर्च च ॥
10.152 घृ प्रस्रवणे । स्रावण इत्येके ॥
10.153 पचि विस्तारवचने ॥
10.154 तिज निशाने निशातने ॥
10.155 कृईत संशब्दने ॥
10.156 वर्ध छेदनपूरनयोः ॥
10.157 कुबि आच्छादने छादने ॥
10.158 कुभि इत्येके ॥
10.159 लुबिऽ ॥
10.160 तुबि अदर्शने । अर्दन इत्येके ॥
10.161 ह्लप व्यक्तायां वाचि ॥
10.162 क्लप इत्येके ॥
10.163 ह्रप इत्यन्ये ॥
10.164 चुटि छेदने ॥
10.165 मृडिऽ ॥
10.166 तुडिऽ ॥
10.167 इल प्रेरणे ॥
10.168 म्रक्ष म्लेच्छने ॥
10.169 म्रछ इत्येके ॥
10.170 म्लेछऽ ॥
10.171 म्रक्ष छेदने । म्लेछ अव्यक्तायां वाचि ॥
10.172 ब्रूसऽ ॥
10.173 बर्ह हिंसायाम् । केचिदिह गर्जऽ गर्द शब्दे गर्ध अभिकाङ्क्षायामिति पठन्ति ॥
10.174 व्रूसऽ ॥
10.175 वर्ह इत्येके ॥
10.176 व्रूष इत्यन्ये ॥
10.177 गर्जऽ ॥
10.178 गर्द शब्दे ॥
10.179 गर्ध अभिकाङ्क्षायाम् ॥
10.180 गुर्द पूर्वनिकेतने । गुर्दऽ ॥
10.181 पूर्व निकेतन इत्यन्ये ॥
10.182 जसि रक्षणे । मोक्षण इत्येके इति केचित् ॥
10.183 ईड स्तुतौ ॥
10.184 जसु हिंसायाम् ॥
10.185 पिडि सङ्घाते ॥
10.186 पिठि इत्येके ॥
10.187 रुष रोषे ॥
10.188 रुट इत्येके ॥
10.189 डिप क्षेपे ॥
10.190 ष्टुप समुच्छ्राये ॥
10.191 ष्टूप इत्येके । इति चुरादय उदात्ता उदात्तेतः ॥
10.192 चित सञ्चेतने ॥
10.193 दशि दंशने दर्शनदंशनयोः ॥
10.194 दसि दर्शनदंशनयोः ॥
10.195 दस इत्यप्येके ॥
10.196 डपऽ ॥
10.197 डिप सङ्घाते ॥
10.198 तत्रि कुटुम्बधारणे ॥
10.199 मत्रि गुप्तपरिभाषणे ॥
10.200 स्पश ग्रहणसंश्लेषणयोः ॥
10.201 तर्जऽ ॥
10.202 भर्त्स सन्तर्जने तर्जने ॥
10.203 बस्तऽ ॥
10.204 गन्ध अर्दने ॥
10.205 वस्त इत्येके ॥
10.206 हस्त इत्यन्ये ॥
10.207 विष्क हिंसायाम् ॥
10.208 हिष्क इत्येके ॥
10.209 निष्क परिमाणे ॥
10.210 लल ईप्सायाम् ॥
10.211 कूण सङ्कोचने ॥
10.212 तूण पूरणे ॥
10.213 भ्रूण आशाविशङ्कयोः आशायाम् ॥
10.214 शठ श्लाघायाम् ॥
10.215 यक्ष पूजायाम् ॥
10.216 स्यम वितर्के ॥
10.217 गूर उद्यमने ॥
10.218 शमऽ ॥
10.219 लक्ष आलोचने ॥
10.220 कुत्स अवक्षेपने ॥
10.221 त्रुट छेदने ॥
10.222 कुट इत्येके ॥
10.223 गल स्रवणे ॥
10.224 भल आभण्डने ॥
10.225 कूट अप्रदाने । अवसादन इत्येके ॥
10.226 कुट्ट प्रतापने ॥
10.227 वञ्चु प्रलम्भने ॥
10.228 वृष शक्तिबन्धने ॥
10.229 मद तृप्तियोगे ॥
10.230 दिवु परिकूजने ॥
10.231 गृई विज्ञाने ॥
10.232 विद चेतनाख्याननिवासेषु ॥
10.233 मन स्तम्भे ॥
10.234 मान इत्येके ॥
10.235 यु जुगुप्सायाम् ॥
10.236 कुस्म नाम्नो वा । कुत्सिस्मयने । इत्याकुत्सीया उदात्ता अनुदात्तेतः ॥
10.288 लिजिऽ ॥
10.289 लुजिऽ ॥
10.290 भजिऽ ॥
10.291 लघिऽ ॥
10.292 त्रसिऽ ॥
10.293 पिसिऽ ॥
10.294 कुसिऽ ॥
10.295 दशिऽ ॥
10.296 कुशिऽ ॥
10.297 घटऽ ॥
10.298 घटिऽ ॥
10.299 बृहिऽ वृहिऽ ॥
10.300 बर्हऽ वर्हऽ ॥
10.301 बल्हऽ वल्हऽ ॥
10.302 गुपऽ ॥
10.303 धूपऽ धुपऽ ॥
10.304 विछऽ ॥
10.305 चीवऽ चीबऽ ॥
10.306 पुथऽ ॥
10.307 लोकृऽ ॥
10.308 लोचृऽ ॥
10.309 णडऽ ॥
10.310 कुपऽ ॥
10.311 तर्कऽ ॥
10.312 वृतुऽ ॥
10.313 वृधु भाषार्थाः ॥
10.314 रुटऽ ॥
10.315 लजिऽ ॥
10.316 अजिऽ ॥
10.317 दसिऽ ॥
10.318 भृशिऽ ॥
10.319 रुशिऽ ॥
10.320 शीकऽ ॥
10.321 रुसिऽ ॥
10.322 नटऽ ॥
10.323 पुटिऽ ॥
10.324 जिऽ ॥
10.325 चिऽ जुचि जिवि ॥
10.326 रघिऽ ॥
10.327 लघिऽ ॥
10.328 अहिऽ ॥
10.329 रहिऽ ॥
10.330 महि च ॥
10.331 लडिऽ ॥
10.332 तडऽ ॥
10.333 नल च ॥
10.334 पूरी आप्यायने ॥
10.335 रुज हिंसायाम् ॥
10.336 ष्वद आस्वादने ॥
10.337 स्वाद इत्येके ॥ आ धृषाद्वा ॥
10.338 युजऽ ॥
10.339 पृच संयमने ॥
10.340 अर्च पूजायाम् ॥
10.341 षह मर्षणे ॥
10.342 ईर क्षेपे ॥
10.343 ली द्रवीकरणे ॥
10.344 वृजी वर्जने ॥
10.345 वृञ् आवरणे ॥
10.346 जृई वयोहानौ ॥
10.347 ज्रि च ॥
10.348 रिच वियोजनसम्पर्चनयोः ॥
10.349 शिष असर्वोपयोगे ॥
10.350 तप दाहे ॥
10.351 तृप तृप्तौ । सन्दीपन इत्येके ॥
10.352 छृदी सन्दीपने ॥
10.353 चृपऽ ॥
10.354 छृपऽ ॥
10.355 तृपऽ ॥
10.356 दृप सन्दीपने इत्येके ॥
10.357 दृभी भये ग्रन्थे ॥
10.358 दृभ सन्दर्भे ॥
10.359 छद संवरणे ॥
10.360 श्रथ मोक्षणे । हिंसायामित्येके ॥
10.361 मी गतौ ॥
10.362 ग्रन्थ बन्धने ॥
10.363 शीक आमर्षणे ॥
10.364 चीक च ॥
10.365 अर्द अर्द हिंसायाम् । स्वरितेदित्येके ॥
10.366 हिसि हिंसायाम् ॥
10.367 अर्ह पूजायाम् ॥
10.368 आङः षद पद्यर्थे ॥
10.369 शुन्ध शौचकर्मणि ॥
10.370 छद अपवारणे ॥
10.371 जुष परितर्कने । परितर्पण इत्यन्ये ॥
10.372 धूञ् कम्पने ॥
10.373 प्रीञ् तर्पने ॥
10.374 श्रन्थऽ ॥
10.375 ग्रन्थ सन्दर्भे ॥
10.376 आपॢ आपॢ लम्भने । स्वरितेदयमित्येके ॥
10.377 तनु श्रद्धोपकरणयोः । उपसर्गाच्च दैर्घ्ये ॥
10.378 चन श्रद्धोपहननयोरित्येके ॥
10.379 वद वद सन्देशवचने । स्वरितेत् । अनुदात्तेदित्येके ॥
10.380 वच परिभाषणे ॥
10.381 मान पूजायाम् ॥
10.382 भू प्राप्तावात्मनेपदी वा । णिच्सन्नियोगेनैवात्मनेपदमित्येके ॥
10.383 गर्ह विनिन्दने ॥
10.384 मार्ग अन्वेषणे ॥
10.385 कठि शोके । प्रायेणोत्पूर्व उत्कण्ठावचनः ॥
10.386 मृजू शौचालङ्कारयोः ॥
10.387 मृष मृष तितिक्षायाम् । स्वरितेत् । अनुदात्तेदित्येके ॥
10.388 धृष प्रसहने । इत्याधृषीयाः ॥
10.389 कथ वाक्यप्रबन्धे वाक्यप्रबन्धने ॥
10.390 वर ईप्सायाम् ॥
10.391 गण सङ्ख्याने ॥
10.392 शठऽ ॥
10.393 श्वठ सम्यगवभाषणे ॥
10.394 पटऽ ॥
10.395 वट ग्रन्थे ॥
10.396 रह त्यागे ॥
10.397 रङ्ग गतौ ॥
10.398 स्तनऽ ॥
10.399 गदी देवशब्दे ॥
10.400 पत गतौ वा । वादन्त इत्येके ॥
10.401 पष अनुपसर्गात् गतौ ॥
10.402 स्वर आक्षेपे ॥
10.403 रच प्रतियत्ने ॥
10.404 कल गतौ सङ्ख्याने च ॥
10.405 चह परिकल्कने ॥
10.406 मह पूजायाम् ॥
10.407 सारऽ सरऽ ॥
10.408 कृपऽ ॥
10.409 श्रथ दौर्बल्ये ॥
10.410 स्पृह ईप्सायाम् ॥
10.411 भाम क्रोधे ॥
10.412 सूच पैशुन्ये ॥
10.413 खेट भक्षणे ॥
10.414 खेड इत्येके ॥
10.415 खोट इत्यन्ये ॥
10.416 क्षोट क्षेपे ॥
10.417 गोम उपलेपने ॥
10.418 कुमार क्रीडायाम् ॥
10.419 शील उपधारणे ॥
10.420 साम सान्त्वप्रयोगे ॥
10.421 वेल कालोपदेशे ॥
10.422 काल च इति पृथग्धातुरित्येके ॥
10.423 पल्यूल लवनपवनयोः ॥
10.424 वात सुखसेवनयोः ॥
10.425 गवेष मार्गणे ॥
10.426 वास उपसेवायाम् ॥
10.427 निवास आच्छादने ॥
10.428 भाज पृथक्कर्मणि ॥
10.429 सभाज प्रीतिदर्शनयोः । प्रीतिसेवनयोरित्येके ॥
10.430 ऊन परिहाणे ॥
10.431 ध्वन शब्दे ॥
10.432 कूट परितापे । परिदाह इत्यन्ये ॥
10.433 सङ्केतऽ ॥
10.434 ग्रामऽ ॥
10.435 कुणऽ ॥
10.436 गुण चामन्त्रणे ॥
10.437 केत श्रावणे निमन्त्रणे च ॥
10.438 कूण सङ्कोचनेऽपि ॥
10.439 स्तेन चौर्ये ॥ आ गर्वादात्मनेपदिनः ॥
10.440 पद गतौ ॥
10.441 गृह ग्रहणे ॥
10.442 मृग अन्वेषणे ॥
10.443 कुह विस्मापने ॥
10.444 शूरऽ ॥
10.445 वीर विक्रान्तौ ॥
10.446 स्थूल परिबृंहणे ॥
10.447 अर्थ उपयाच्ञायाम् ॥
10.448 सत्र सत्त्र सन्तानक्रियायाम् ॥
10.449 गर्व माने । इत्यागर्वीयाः ॥
10.450 सूत्र वेष्टने । विमोचन इत्यन्ये ॥
10.451 मूत्र प्रस्रवणे ॥
10.452 रूक्ष पारुष्ये ॥
10.453 पारऽ ॥
10.454 तीर कर्मसमाप्तौ ॥
10.455 पुट संसर्गे ॥
10.456 कत्र कत्त्र शैथिल्ये ॥
10.457 कर्त इत्यप्येके । प्रातिपदिकाद्धात्वर्थे बहुलमिष्टवच्च । तत्करोति तदाचष्टे । तेनातिक्रामति । धातुरूपं च । कर्तृकरणाद्धात्वर्थे ॥
10.458 बष्क दर्शने ॥
10.459 चित्र चित्रीकरणे । कदाचिद्दर्शने ॥
10.460 अंस समाघाते ॥
10.461 वट विभाजने ॥
10.462 रट परिभाषणे ॥
10.463 लज प्रकाशने ॥
10.464 वटिऽ ॥
10.465 लजि इत्येके ॥
10.466 मिश्र सम्पर्के ॥
10.467 सङ्ग्राम युद्धे । अयमनुदात्तेत् ॥
10.468 स्तोम श्लाघायाम् ॥
10.469 छिद्र कर्णभेदने । करणभेदन इत्येके ॥
10.470 कर्ण भेदने इति धात्वन्तरमित्यपरे ॥
10.471 अन्ध दृष्ट्युपघाते । उपसंहार इत्यन्ये ॥
10.472 दण्ड दण्डनिपाते ॥
10.473 अङ्क पदे लक्षणे च ॥
10.474 अङ्ग च ॥
10.475 सुखऽ ॥
10.476 दुःख तत्क्रियायाम् ॥
10.477 रस आस्वादनस्नेहनयोः ॥
10.478 व्यय वित्तसमुत्सर्गे ॥
10.479 रूप रूपक्रियायाम् ॥
10.480 छेद द्वैधीकरणे ॥
10.481 छद अपवारणे ॥
10.482 लाभ प्रेरणे ॥
10.483 व्रण गात्रविचूर्णने ॥
10.484 वर्ण वर्णक्रियाविस्तारगुणवचनेषु । बहुलमेतन्निदर्शनम् इत्येके ॥
10.485 पर्ण हरितभावे ॥
10.486 विष्क दर्शने ॥
10.487 क्षप प्रेरणे ॥
10.488 वस निवासे ॥