महामोहग्राहग्रसनगलितात्मावगमनो
धियो नानावस्थां स्वयमभिनयंस्तद्गुणतया ।
नानावस्थाः अपारे संसारे विषयविषपूरे जलनिधौ
निमज्योन्मज्यायं भ्रमति कुमतिः कुत्सितगतिः || 141 || ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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