आनन्दप्रतिबिम्बचुम्बिततनुर्वृत्तिस्तमोजृम्भिता
स्यादानन्दमयः प्रियादिगुणकः स्वेष्टार्थलाभोदयः ।
पुण्यस्यानुभवे विभाति कृतिनामानन्दरूपः स्वयं
सर्वो नन्दति यत्र साधु तनुभृन्मात्रः प्रयत्नं विना || 207 || ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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