शिष्य उवाच
मिथ्यात्वेन निषिद्धेषु कोशेष्वेतेषु पञ्चसु ।
सर्वाभावं विना किञ्चिन्न पश्याम्यत्र हे गुरो ।
विज्ञेयं किमु वस्त्वस्ति स्वात्मनाऽऽत्मविपश्चिता || 212 || ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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