अस्थूलमित्येतदसन्निरस्य
सिद्धं स्वतो व्योमवदप्रतर्क्यम् ।
अतो मृषामात्रमिदं प्रतीतं
जहीहि यत्स्वात्मतया गृहीतम् ।
ब्रह्माहमित्येव विशुद्धबुद्ध्या
विद्धि स्वमात्मानमखण्डबोधम् || 250 || ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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