अहङ्कर्तर्यस्मिन्नहमिति मतिं मुञ्च सहसा
विकारात्मन्यात्मप्रतिफलजुषि स्वस्थितिमुषि ।
यदध्यासात्प्राप्ता जनिमृतिजरादुःखबहुला
प्रतीचश्चिन्मूर्तेस्तव सुखतनोः संसृतिरियम् || 305 || ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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