संसारबन्धविच्छित्त्यै तद् द्वयं प्रदहेद्यतिः ।
वासनावृद्धिरेताभ्यां चिन्तया क्रियया बहिः
ताभ्यां प्रवर्धमाना सा सूते संसृतिमात्मनः ।
त्रयाणां च क्षयोपायः सर्वावस्थासु सर्वदा || 315 || ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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