एकान्तस्थितिरिन्द्रियोपरमणे हेतुर्दमश्चेतसः
संरोधे करणं शमेन विलयं यायादहंवासना ।
तेनानन्दरसानुभूतिरचला ब्राह्मी सदा योगिनः
तस्माच्चित्तनिरोध एव सततं कार्यः प्रयत्नो मुनेः || 368 || ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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