शवाकारं यावद्भजति मनुजस्तावदशुचिः
परेभ्यः स्यात्क्लेशो जननमरणव्याधिनिलयः ।
व्याधिनिरयाः यदात्मानं शुद्धं कलयति शिवाकारमचलम्
तदा तेभ्यो मुक्तो भवति हि तदाह श्रुतिरपि || 396 || ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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