जीवेशोभयसंसाररूपदुर्वासनोज्झिता ।
सा सर्वदा भवेद्यस्य स जीवन्मुक्त इष्यते ॥न प्रत्यग्ब्रह्मणोर्भेदं कदापि ब्रह्मसर्गयोः ।
प्रज्ञया यो विजानिति स जीवन्मुक्तलक्षणः || 439 || ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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