वाचा वक्तुमशक्यमेव मनसा मन्तुं न वा शक्यते
स्वानन्दामृतपूरपूरितपरब्रह्माम्बुधेर्वैभवम् ।
अम्भोराशिविशीर्णवार्षिकशिलाभावं भजन्मे मनो
यस्यांशांशलवे विलीनमधुनाऽऽनन्दात्मना निर्वृतम् || 482 || ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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