क्वचिन्मूढो विद्वान् क्वचिदपि महाराजविभवः
क्वचिद्भ्रान्तः सौम्यः क्वचिदजगराचारकलितः
क्वचित्पात्रीभूतः क्वचिदवमतः क्वाप्यविदितः
चरत्येवं प्राज्ञः सततपरमानन्दसुखितः || 542 || ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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