अहिर्निर्ल्वयनीं वायं मुक्त्वा देहं तु तिष्ठति
इतस्ततश्चाल्यमानो यत्किञ्चित्प्राणवायुना
स्त्रोतसा नीयते दारु यथा निम्नोन्नतस्थलम्
दैवेन नीयते देहो यथाकालोपभुक्तिषु || 550 || ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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