संसाराध्वनि तापभानुकिरणप्रोद्भूतदाहव्यथा
खिन्नानां जलकाङ्क्षया मरुभुवि भ्रान्त्या परिभ्राम्यताम्
अत्यासन्नसुधाम्बुधिं सुखकरं ब्रह्माद्वयं दर्शय
त्येषा शङ्करभारती विजयते निर्वाणसन्दायिनी || 580 || ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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