कर्त्रादिभावं प्रतिपद्य राजते
यत्र स्वयं भाति ह्ययं परात्मा ।
स्वयञ्ज्योतिरयं धीमात्रकोपाधिरशेषसाक्षी
न लिप्यते तत्कृतकर्मलेशैः
कर्मलेपैः
यस्मादसङ्गस्तत एव कर्मभिः
न लिप्यते किञ्चिदुपाधिना कृतैः || 99 || ॥
| Word | Transliteration | English | Hindi | Category | Gender | Number | Case |
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