139

विवेकचूडामणि

Verse 139

अखण्डनित्याद्वयबोधशक्त्या स्फुरन्तमात्मानमनन्तवैभवम् । समावृणोत्यावृतिशक्तिरेषा तमोमयी राहुरिवार्कबिम्बम् || 139 || ॥

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