525

विवेकचूडामणि

Verse 525

अखण्डबोधात्मनि निर्विकल्पे विकल्पनं व्योम्नि पुरप्रकल्पनम् तदद्वयानन्दमयात्मना सदा शान्तिं परामेत्य भजस्व मौनम् || 525 || ॥

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